पटना
बिहार में सरकारी परियोजनाओं की रफ्तार को तेज करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब विभिन्न सरकारी विभागों को फ्री या स्थायी रूप से जमीन ट्रांसफर करने के मामले में डीएम और कमिश्नर के अधिकारों का दायरा काफी ज्यादा बढ़ा दिया गया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस बदलाव को लेकर अपना आधिकारिक पत्र भी जारी कर दिया है। विभाग द्वारा उठाए गए इस कदम से छोटे और मध्यम स्तर के प्रोजेक्ट्स के लिए भूमि आवंटन की फाइलों को बार-बार मुख्यालय भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे समय की बड़ी बचत होगी।
पहले सिर्फ 3 एकड़ तक ही सीमित था जिलाधिकारियों का पावर
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह की ओर से जारी किए गए पत्र के अनुसार, पुरानी व्यवस्था के तहत अब तक जिलाधिकारियों को केवल 3 एकड़ तक की ही सरकारी या गैर मजरूआ आम भूमि का हस्तांतरण करने का अधिकार प्राप्त था। वहीं, 3 एकड़ से अधिक और 5 एकड़ तक की भूमि का फ्री हस्तांतरण प्रमंडलीय आयुक्त (कमिश्नर) के स्तर पर किया जा रहा था। हाल ही में विभाग द्वारा की गई उच्च स्तरीय समीक्षा के दौरान यह बात खुलकर सामने आई कि इस पुरानी व्यवस्था के कारण छोटी-छोटी परियोजनाओं के लिए भी जमीन हस्तांतरण में बहुत अधिक समय बर्बाद हो रहा था। इसी लेती-देती को खत्म करने के लिए विभाग ने अब 10 एकड़ तक की जमीन के ट्रांसफर की पूरी शक्ति सीधे तौर पर डीएम को सौंप दी है।
10 से 20 एकड़ तक की जमीन का फैसला करेंगे कमिश्नर
विभाग द्वारा जारी नए नियमों के तहत अब 10 एकड़ से अधिक और 20 एकड़ तक की सरकारी जमीन के फ्री या स्थायी हस्तांतरण की मंजूरी प्रमंडलीय आयुक्त के स्तर पर दी जा सकेगी। यदि किसी बड़ी परियोजना के लिए 20 एकड़ से अधिक भूमि के हस्तांतरण की आवश्यकता होती है, तो उसके लिए अंतिम मंजूरी सीधे राज्य मंत्रिपरिषद के स्तर पर ली जाएगी। इसके साथ ही, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने पारदर्शिता और आधुनिकता को बढ़ावा देने के लिए एक और कड़ा फरमान जारी किया है। विभाग ने सख्त लहजे में दोहराया है कि अब आम जनता या किसी भी कार्य के लिए लैंड रिकार्ड की केवल डिजिटल साइन्ड कॉपी ही ली जाएगी।
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