पश्चिम एशिया में शांति की कोशिशें तेज, अमेरिका–ईरान वार्ता में कई देशों की भागीदारी

दुनिया

नई दिल्ली
अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी शांति समझौते और पश्चिम एशिया में शांति बहाली के लिए स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में उच्चस्तरीय वार्ता चल रही है. इसमें अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत कई शीर्ष नेता भाग ले रहे हैं. कतर के प्रतिनिधि भी इन वार्ताओं में हिस्सा लेंगे. इसी बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका के साथ हुए प्रारंभिक समझौते को लेकर कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं.

उन्होंने कहा कि कतर में फ्रीज किए गए ईरान के 6 अरब डॉलर इस समझौते के तहत वापस किए जाएंगे. ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने कहा, 'समझौता ज्ञापन (MoU) की सभी शर्तें हमारे पक्ष में हैं और इन वार्ताओं तथा बातचीत की उपलब्धियां जल्द ही सामने आएंगी.' उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जिन्होंने हालिया भाषण में ईरान पर कई प्रतिबंधों की बात की थी, अब उन्हीं मुद्दों को ईरानी जनता के अधिकार के रूप में स्वीकार कर चुके हैं.

नेतन्याहू सबसे ज्यादा दुखी होंगे: पेजेश्कियान
पेजेश्कियान ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर भी निशाना साधते हुए कहा कि स्विट्जरलैंड में हो रही वार्ता से सबसे अधिक असंतुष्ट वही होंगे. ईरानी राष्ट्रपति ने कहा, 'अमेरिका की केवल एक ही शर्त है कि हमारे पास परमाणु बम नहीं होना चाहिए. यह वही बात है जिसे हमारे शहीद नेता भी बार-बार कहते थे कि हम परमाणु बम नहीं चाहते. अमेरिका ने कहा कि इसे लिखकर हस्ताक्षर कर दीजिए और हमने हस्ताक्षर कर दिए.'

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस रविवार सुबह ज्यूरिख पहुंचे, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और सलाहकार जेरेड कुशनर पहले से ही वहां मौजूद थे. स्विट्जरलैंड रवाना होने से पहले फॉक्स न्यूज से बातचीत में वेंस ने कहा, 'आज सुबह जेरेड और स्टीव से बात हुई. मेरी समझ के अनुसार चीजें अच्छी दिशा में आगे बढ़ रही हैं.' ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA के मुताबिक, ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ कर रहे हैं.

प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री अब्बास अरागची, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के उप सचिव अली बाघेरी कानी और ईरान सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती भी शामिल हैं. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी रविवार को ज्यूरिख पहुंचे. उनके साथ सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद हैं. पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने शनिवार को जारी बयान में कहा, 'इस्लामाबाद एमओयू के तहत बनी सहमतियों को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका में प्रक्रिया को सुगम बनाना जारी रखेगा.'

अमेरिका-ईरान ने साइन किया था एमओयू
पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने एक एमओयू पर साइन किए थे, जिसने पश्चिम एशिया में शांति बहाली के लिए 60 दिनों की वार्ता प्रक्रिया की शुरुआत की. इस समझौते में पाकिस्तान ने प्रमुख मध्यस्थ और गारंटर की भूमिका निभाई है. वार्ता के तकनीकी चरण 19 जून से शुरू होने थे, लेकिन इजरायल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच नई झड़पों के कारण इसमें देरी हुई.

स्विट्जरलैंड में हो रही इस उच्चस्तरीय वार्ता का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण और अमेरिका के साथ अंतरिम शांति समझौते को स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ाना है. ईरान और अमेरिका के बीच एमओयू साइन होने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुजको फिर से खोल दिया गया था. यह वही रणनीतिक समुद्री मार्ग है, जहां से सामान्य परिस्थितियों में दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है. हालांकि, ईरान ने शनिवार को दावा किया कि लेबनान में इजरायली हमलों के कारण उसने होर्मुज को फिर से बंद कर दिया है.

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