मुंबई
लोकसभा के छह सांसदों के साथ छोड़ने के बाद उद्धव ठाकरे को एक और गहरा जख्म मिला है. आदित्य ठाकरे के सबसे भरोसेमंद और करीबी नेता सचिन अहीर ने भी बगावत कर दी है. अहीर अब एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं. मंगलवार को उन्होंने विधान परिषद उपसभापति पद के लिए महायुति के उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन दाखिल किया. यह चुनाव बुधवार को होना है. सचिन अहीर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में पर्चा भरा. इस मौके पर डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार भी मौजूद थीं. वर्ली में आदित्य ठाकरे का राजनीतिक आधार मजबूत करने में अहीर का बड़ा रोल रहा है. ऐसे में उनका जाना ठाकरे परिवार के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है. सचिन अहीर साल 2019 में एनसीपी छोड़कर शिवसेना में आए थे. उन्हें 2022 में एमएलसी बनाया गया था।
बीजेपी नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने इस टूट के लिए उद्धव ठाकरे और संजय राउत के अहंकार को जिम्मेदार ठहराया है. बावनकुले ने साफ कहा कि बीजेपी का अहीर के इस कदम से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा कि ठाकरे गुट अपने कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं देता. यही वजह है कि पार्टी में भारी नाराजगी है और नेता लगातार साथ छोड़ रहे हैं।
शिवसेना के दोनों गुटों में यह सियासी जंग काफी तेज हो गई है. कुछ ही दिन पहले पार्टी के छह सांसदों ने भी शिंदे गुट जॉइन किया था. पार्टी के नेता इसे ‘ऑपरेशन टाइगर’ का नाम दे रहे हैं. विधान परिषद चुनाव से पहले यह बगावत महाविकास अघाड़ी के लिए खतरे की घंटी है।
शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार ने क्या दावा किया?
इस बड़े सियासी फेरबदल पर एनसीपी शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार ने कहा, ‘सचिन अहीर पहले हमारी पार्टी में थे. फिर वह उद्धव ठाकरे के साथ गए और अब शिंदे गुट में चले गए.’ उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए काफी खतरनाक बताया. रोहित ने आरोप लगाया कि पैसे और सत्ता के दम पर नेताओं को खरीदा जा रहा है. उन्होंने आशंका जताई कि शिंदे गुट अब उनकी पार्टी को भी निशाना बना सकता है।
हालांकि उन्होंने दावा किया कि शिंदे गुट को अब वैसी सफलता नहीं मिलेगी. वहीं ठाकरे गुट के नेता अंबादास दानवे ने एक अहम जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस चुनाव में जगन्नाथ अभ्यंकर महाविकास अघाड़ी के उम्मीदवार हैं।
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