रूस से तेल आयात में नया रिकॉर्ड बना सकता है भारत, जून में बढ़ी खरीद ने सबको चौंकाया

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नई दिल्‍ली
जून में रूसी तेल का आयात रिकॉर्ड हाई पर पहुंच सकता है. एनर्जी एक्‍सपर्ट अनस अलहाजी ने इसका दावा किया है. उन्‍होंने कहा कि रूसी कच्‍चे तेल से लदे टैंकरों की बड़ी संख्या भारतीय बंदरगाहों पर देखी गई है. इतनी बड़ी संख्‍या मैंने पहले कभी नहीं देखी है। 

एनजीपी एनर्जी कैपिटल मैनेजमेंट के मुख्य अर्थशास्त्री अलहाजी ने कहा कि जैसा कि मैंने जून की शुरुआत में कहा था, अगर इस महीने (जून) रूस से भारत का कच्चा तेल आयात रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच जाए तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा. मैंने भारतीय बंदरगाहों पर रूसी कच्चे तेल से भरे इतने टैंकर पहले कभी नहीं देखे। 

अलहाजी ने केप्लर का एक नक्शा भी शेयर किया जिसमें कई टैंकर रूसी कच्चे तेल को भारत भर के बंदरगाहों तक ले जाते हुए दिखाए गए थे.  उनका यह बयान सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की एक रिपोर्ट के कुछ हफ्तों बाद आई है, जिसमें दिखाया गया है कि भारत मई में रूसी जीवाश्म ईंधन का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना रहा, जिसने अनुमानित $6.7 बिलियन मूल्य के रूसी हाइड्रोकार्बन का आयात किया। 

कितना हुआ जून में रूसी तेल का आयात
CREA के अनुसार, इस महीने के दौरान रूस से भारत के आयात में कच्‍चे तेल का हिस्‍सा करीब 83 फीसदी था, जिसकी वैल्‍यू 48 अरब यूरो था. तेल उत्‍पादों और कोयले के आयात की कीमत 550 मिलियन यूरो और 429 मिलियन यूरो था. यह भी पता चला है कि रूस से कच्‍चे तेल की खरीद में 21 फीसदी की बढ़ोतरी के कारण मई में भारत के कुल कच्‍चे तेल के आयात की मात्रा में महीने दर महीने 8 फीसदी की तेजी आई है। 

भारत के रिफाइनर्स में बढ़ी रूसी तेल की मात्रा 
भारत के कुछ सबसे बड़े रिफाइनिंग सेंटर्स ने रूसी तेल की आवक में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की है. गुजरात के वडीनार रिफाइनरी में उतारे गए तेल की मात्रा अप्रैल के स्तर से 36% बढ़ी, जबकि जामनगर रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में आपूर्ति 14% बढ़ी. सरकारी स्वामित्व वाली रिफाइनरियों ने भी इस साल की शुरुआत में आयात फिर से शुरू करने के बाद खरीद बढ़ा दी. मई में न्यू मैंगलोर रिफाइनरी को रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति पिछले महीने की तुलना में 13% बढ़ी, जबकि विशाखापत्तनम रिफाइनरी में आयात में 42% की वृद्धि हुई। 

रूसी तेल से मिली मदद 
ओडिशा की पारादीप रिफाइनरी ने दो सालों में रूसी तेल की मात्रा में डबल बढ़ोतरी दर्ज की है. यूक्रेन पर मॉस्को के आक्रमण के बाद वेस्‍ट कॉन्‍ट्रैक्‍ट्स और व्यापार प्रतिबंधों ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को नया रूप दिया है, जिसके चलते रूस भारत का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना हुआ है. भारतीय रिफाइनर कंपनियों ने रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद में लगातार वृद्धि की है, जिससे ऊर्जा लागत को कंट्रोल करने और रिफाइनिंग मार्जिन को बढ़ाने में मदद मिली है। बता दें सीआरईए के अनुसार, मई में रूस के कच्चे तेल के निर्यात में चीन की हिस्सेदारी 50% थी, उसके बाद भारत की हिस्सेदारी 36%, तुर्की की 6% और यूरोपीय संघ की 5% थी। 

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