कलेसर नेशनल पार्क में तेंदुओं के संरक्षण पर फोकस, प्राकृतिक आवास में ही मिलेंगी भोजन और पानी की सुविधाएं

राज्य

यमुना नगर.

न महोत्सव के दौरान तीन राज्यों की सीमा से सटे कलेसर नेशनल पार्क में इस बार केवल पौधे नहीं लगाए जाएंगे। जंगल को और बेहतर बनाने के लिए घास के खुले मैदान (ग्रासलैंड), ग्रीन कारिडोर और स्थायी जल स्रोत भी विकसित किए जाएंगे।

इसका उद्देश्य तेंदुओं और दूसरे वन्यजीवों को जंगल में ही भोजन और पानी उपलब्ध कराना, उनका प्राकृतिक आवास मजबूत करना। साथ ही उन्हें आबादी की ओर आने से रोकना है। 25 हजार एकड़ के राष्ट्रीय उद्यान व वन्यजीव विहार कलेसर में 50 तेंदुओं की मौजूदगी मानी जा रही है। उनकी बढ़ती संख्या को देखते हुए वन्य प्राणी विभाग ने जंगल के अलग-अलग हिस्सों में चरणबद्ध तरीके से पांच से सात हेक्टेयर क्षेत्र में घास के मैदान विकसित करने की योजना बनाई है। इन मैदानों में हिरण, जंगली सूअर, खरगोश और सांभर जैसे शाकाहारी वन्यजीव बढ़ेंगे, जो तेंदुओं का प्राकृतिक शिकार हैं। इससे तेंदुओं को भोजन के लिए जंगल छोड़कर गांवों या आबादी की ओर जाने की जरूरत कम पड़ेगी।

जंगल में ही तेंदुओं को पर्याप्त शिकार मिलेगा
वन्य प्राणी विभाग के इंस्पेक्टर ज्योति कुमार ने बताया कि घास के मैदान बनने से शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या बढ़ेगी। इससे तेंदुओं को जंगल में ही पर्याप्त शिकार मिलेगा। उनके गांवों की ओर आने की घटनाएं कम होंगी। एमएलएन कालेज के जूलाजी विभाग के सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष डा. राजीव कलसी ने कहा कि वन महोत्सव केवल पौधे लगाने का अभियान नहीं है। यह जंगल का प्राकृतिक संतुलन मजबूत करने का भी मौका है। कलेसर में घास के मैदान विकसित होने से तेंदुओं और दूसरे वन्यजीवों के संरक्षण को लंबे समय तक फायदा मिलेगा।

कलेसर नेशनल पार्क उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क,राजाजी नेशनल पार्क की मोहांड रेंज सहारनपुर उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के सिम्बलबाड़ा वन्यजीव अभयारण्य से ग्रीन कारिडोर के जरिए जुड़ा है। वन विभाग इन रास्तों से अतिक्रमण हटाने और अवैध गतिविधियों पर सख्ती करेगा। गांवों के पास सोलर फेंसिंग और मवेशियों के लिए मजबूत बाड़ लगाने की भी योजना है। जंगल में स्थायी जल स्रोत भी बनाएंगे, ताकि गर्मी और सूखे के समय वन्यजीवों को पानी के लिए जंगल से बाहर न जाना पड़े।

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