ठाणे
अचानक तबीयत बिगड़ने के कारण महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को इलाज के लिए ठाणे के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि उनकी हालत पूरी तरह से स्थिर है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है।
पिछले कुछ दिनों से काम के भारी दबाव और लगातार भागदौड़ का सीधा असर एकनाथ शिंदे की सेहत पर पड़ा है। उन्हें कमजोरी महसूस हो रही थी। विधानमंडल की कार्यवाही के दौरान ही उन्हें बुखार की शिकायत हुई थी। इसके बावजूद वह कुछ तय कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए ठाणे पहुंचे, लेकिन तबीयत ज्यादा नासाज होने के चलते उन्हें अपने सभी कार्यक्रम रद्द करने पड़े।
डॉक्टरों ने दी अस्पताल में भर्ती होने की सलाह
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों के राजनीतिक घटनाक्रमों और फिर विधानमंडल का अधिवेशन शुरू होने के कारण एकनाथ शिंदे लगातार व्यस्त चल रहे थे। माना जा रहा है कि थकान, वायरल बुखार और कमजोरी की वजह से ही उनका स्वास्थ्य बिगड़ा।
डॉक्टरों ने उन्हें घर पर रहकर आराम करने के बजाय अस्पताल में भर्ती होकर समुचित इलाज कराने की सलाह दी। इसके बाद शुक्रवार रात उन्हें फौरन ठाणे के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, चिंता की कोई बात नहीं है और उनकी स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है।
रात 2 बजे हुआ शुभांगी पाटिल का पार्टी प्रवेश
डिप्टी सीएम के अस्पताल में भर्ती होने की वजह से ठाणे में होने वाले एक अहम सियासी कार्यक्रम में भी बदलाव करना पड़ा। दरअसल, ठाणे के गंगूबाई शिंदे हॉल में शुक्रवार दोपहर धुले से ठाकरे गुट की शिवसेना उपनेत्री शुभांगी पाटिल का पार्टी प्रवेश समारोह आयोजित होने वाला था। लेकिन एकनाथ शिंदे के अचानक बीमार पड़ने के कारण इसे टालना पड़ा। आखिरकार देर रात 2 बजे कल्याण के सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे की मौजूदगी में शुभांगी पाटिल ने ठाणे में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।
वायरल बुखार और लगातार व्यस्तता के बीच अस्पताल पहुंचे शिंदे
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार शुक्रवार दोपहर विधानसभा सत्र के दौरान ही एकनाथ शिंदे को तेज बुखार और कमजोरी महसूस होने लगी थी. शुरुआत में इसे सामान्य थकान माना गया, लेकिन शाम तक तबीयत में सुधार नहीं होने पर डॉक्टरों ने जांच की सलाह दी. देर रात उन्हें ठाणे के जुपिटर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है।
लगातार राजनीतिक बैठकों, विधानसभा सत्र और प्रशासनिक गतिविधियों के कारण पिछले कुछ दिनों से उन्हें पर्याप्त आराम नहीं मिल पा रहा था. डॉक्टरों का मानना है कि वायरल संक्रमण के साथ लगातार काम का दबाव भी उनकी तबीयत बिगड़ने की एक वजह हो सकता है. फिलहाल उनकी मेडिकल जांच जारी है और स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है।
शिवसेना (शिंदे गुट) के नेताओं ने बताया कि उपमुख्यमंत्री की स्थिति स्थिर है और उन्हें केवल निगरानी तथा आराम के लिए अस्पताल में रखा गया है. पार्टी की ओर से समर्थकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और आधिकारिक जानकारी का इंतजार करने की अपील भी की गई है।
महत्वपूर्ण कार्यक्रम फिलहाल स्थगित
स्वास्थ्य संबंधी समस्या के चलते एकनाथ शिंदे के कई राजनीतिक कार्यक्रम फिलहाल रद्द या स्थगित कर दिए गए हैं. शनिवार को प्रस्तावित एक महत्वपूर्ण पार्टी दीक्षांत समारोह में भी अब वह शामिल नहीं हो पाएंगे. इसके अलावा आगामी राजनीतिक दौरों की नई तारीख बाद में तय की जाएगी।
डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा इलाज
अस्पताल सूत्रों के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है. वायरल बुखार और कमजोरी को देखते हुए उन्हें आराम करने की सलाह दी गई है. शुरुआती इलाज के बाद उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और फिलहाल किसी गंभीर जटिलता की जानकारी सामने नहीं आई है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चिंता
महाराष्ट्र की राजनीति में एकनाथ शिंदे की अहम भूमिका को देखते हुए उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर तेजी से फैल गई. सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई नेताओं ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है. फिलहाल पार्टी का कहना है कि डॉक्टरों की सलाह के बाद ही उनकी सार्वजनिक गतिविधियां दोबारा शुरू होंगी।
एकनाथ संभाजी शिंदे महाराष्ट्र के एक प्रमुख राजनेता हैं, जो वर्तमान में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत हैं। शिंदे इससे पहले 30 जून 2022 से 5 दिसंबर 2024 तक महाराष्ट्र के 20वें मुख्यमंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं। राजनीति में उनकी शुरुआत 1980 के दशक में शिवसेना के दिग्गज नेता आनंद दीघे के मार्गदर्शन में हुई, जिसके बाद वे 1997 में ठाणे नगर निगम में पहली बार पार्षद चुने गए।
ठाणे के कोपरी-पांचपाखाड़ी विधानसभा क्षेत्र से 2004 से लगातार विधायक रहे शिंदे ने 2022 के महाराष्ट्र राजनीतिक संकट के दौरान शिवसेना में बगावत का नेतृत्व किया, जिसके परिणामस्वरूप तत्कालीन महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार गिर गई थी और उन्होंने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई। फरवरी 2023 से वे शिवसेना के अध्यक्ष की भूमिका भी निभा रहे हैं, जब चुनाव आयोग ने उनके गुट को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी थी। 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद हुए नेतृत्व परिवर्तन में, उन्होंने देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री बनने पर उपमुख्यमंत्री का पद संभाला।
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