7वीं के छात्र ने तैयार किया स्मार्ट सॉफ्टवेयर, क्लास टीचर का मोबाइल लॉक करने की अनोखी तकनीक

राज्य

बक्सर.

प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। जब जिज्ञासा, मेहनत और कुछ नया करने का जुनून साथ हो, तो छोटे गांव का एक विद्यार्थी भी बड़े सपनों को हकीकत में बदल सकता है। जिले के बरुणा गांव के महज 13 वर्षीय आकाश मौर्य ने ऐसा ही उदाहरण पेश किया है।

अपने गांव के एक निजी स्कूल में सातवीं कक्षा के छात्र आकाश ने 'कमांड सेंटर और लाइव लिंक' नामक एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया है, जो विद्यालयों की पूरी व्यवस्था को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित करने का दावा करता है। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से शिक्षक की उपस्थिति, विद्यार्थियों की पढ़ाई, फीस, परीक्षा परिणाम, अभिभावकों से संवाद और विद्यालय प्रबंधन जैसे कई कार्य एक ही प्लेटफॉर्म से संचालित किए जा सकते हैं। इतनी कम उम्र में तकनीक के क्षेत्र में आकाश की यह उपलब्धि न केवल बक्सर, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा का विषय बन गई है।

डिजिटल स्कूल का सपना, गांव से हुई शुरुआत
बरुणा निवासी आकाश मौर्य, श्याम जी सिंध के पुत्र तथा पूर्व मुखिया रामजी सिंध के पौत्र हैं। सातवीं कक्षा में अध्ययनरत आकाश का सपना देश के हर विद्यालय को तकनीक से जोड़ना है। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से इस सॉफ्टवेयर का निर्माण किया गया है।

शिक्षक की उपस्थिति से मोबाइल लॉक तक की सुविधा
आकाश ने बताया कि विद्यालय परिसर में प्रवेश करते ही शिक्षक की उपस्थिति स्वत: दर्ज हो जाएगी। पढ़ाई के दौरान शिक्षक का मोबाइल लॉक रहेगा, जिससे सोशल मीडिया का उपयोग नहीं हो सकेगा और कक्षा में पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। इससे अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

एक ही एप पर स्कूल की पूरी व्यवस्था
इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से अभिभावक बच्चों की उपस्थिति, परीक्षा परिणाम, होमवर्क, ऑनलाइन नोट्स, विद्यालय की गतिविधियां और ऑनलाइन प्रवेश आवेदन की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इसके अलावा विद्यालय त्याग प्रमाण-पत्र, चरित्र प्रमाण-पत्र, मार्कशीट और प्रवेश-पत्र भी इसी प्लेटफॉर्म से प्राप्त किए जा सकेंगे।

फीस भुगतान और एआई आधारित निगरानी
इस ऐप के जरिए अभिभावक बार कोड स्कैन कर घर बैठे फीस जमा कर सकेंगे। भुगतान की आटोमैटिक रसीद भी तुरंत उपलब्ध होगी। एआई तकनीक यह भी बताएगी कि किन अभिभावकों द्वारा फीस जमा करने में लगातार विलंब किया जा रहा है। विद्यालय प्रबंधन आय-व्यय और शिक्षक वेतन भुगतान की निगरानी भी आसानी से कर सकेगा।

पांच भाषाओं में काम कर रहा सॉफ्टवेयर
आकाश के अनुसार फिलहाल यह सॉफ्टवेयर हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, बांग्ला और मराठी भाषा में उपलब्ध है। अभिभावक ऑनलाइन शिकायत और सुझाव भी दर्ज कर सकते हैं। बच्चों की शैक्षणिक प्रगति और विद्यालय की हर गतिविधि की जानकारी उन्हें समय-समय पर मिलती रहेगी।

छह से अधिक स्कूलों में सफल प्रयोग
छात्र आकाश ने बताया कि प्रयोग के तौर पर इस सॉफ्टवेयर को छह से अधिक निजी विद्यालयों में शुरू किया जा चुका है। वहां से सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद अब इसे बड़े स्तर पर लागू करने की योजना है। उनका लक्ष्य देशभर के विद्यालयों को इस तकनीक से जोड़ना है।

टीमवर्क बना सफलता की ताकत
इस कार्य में राहुल कुमार, अंकित कुमार और अजीत कुमार भी आकाश के साथ जुड़े हैं। सभी मिलकर सॉफ्टवेयर को लगातार बेहतर बनाने में जुटे हैं। टीम का मानना है कि तकनीक के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

जुड़वा भाई भी बना रहा अलग पहचान:
आकाश का जुड़वा भाई अंकू मौर्य भी महज 13 वर्ष की उम्र में यूपीएससी की तैयारी कर रहा है। एक ही परिवार के दो बच्चों की असाधारण सोच और लक्ष्य आज क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry