धनबाद सरकारी जमीन घोटाला: कमिश्नर के फैसले पर फिर उठे गंभीर सवाल

राज्य

रांची
 धनबाद के हीरापुर मौजा की 18 कट्ठा सरकारी जमीन हड़पने के मामले में धनबाद के तत्कालीन डीसी की सही रिपोर्ट को उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल हजारीबाग के आयुक्त (कमिश्नर) ने पलटते हुए जमीन माफिया के पक्ष में फैसला दे दिया था।

तत्कालीन लोकायुक्त ने मामले को पकड़ा और राजस्व पर्षद से कमिश्नर की रिपोर्ट पर मंतव्य व कार्रवाई की अनुशंसा की। राजस्व पर्षद के सदस्य ने पूरे मामले की सुनवाई की और अपने आदेश में लोकायुक्त के निष्कर्ष की सराहना करते हुए दोषी पदाधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए मुख्य सचिव से अनुशंसा की थी।

अब नए लोकायुक्त सेवानिवृत्त जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता ने राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव, उपायुक्त धनबाद व एलआरडीसी धनबाद को पत्र लिखकर पूछा है कि सरकारी जमीन वापस करने को लेकर क्या कार्रवाई की गई और दोषी पदाधिकारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई हुई है।

लोकायुक्त ने अपनी लंबित फाइल के निष्पादन के क्रम में उक्त मामले की समीक्षा की और फिर इसपर संबंधित अधिकारियों से जानकारी मांगी है।

मार्च 2011 में लोकायुक्त कार्यालय में की गई थी लिखित शिकायत
धनबाद के हीरापुर दुर्गा मंदिर के पूर्व अधीक्षक सूर्यनारायण झा ने मार्च 2011 में लोकायुक्त कार्यालय में लिखित शिकायत की थी। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया था कि धनबाद के हीरापुर मौजा, थाना नंबर-7, खाता नगरपालिका, प्लट नंबर 2907, 2908, 2906 की 18 कट्ठा जमीन झारखंड सरकार की है, जिसकी उस वक्त कीमत करीब तीन करोड़ रुपये बताई गई थी।

उस जमीन को धनबाद अंचल कार्यालय के राजस्व कर्मचारी, सर्किल निरीक्षक व अंचल पदाधिकारी ने एक दबंग जमीन माफिया जयप्रकाश खेतान के नाम दाखिल खारिज कर बहुमंजिली व्यवसायिक भवन निर्माण के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र दे दिया है।

इस दाखिल खारिज व अनापत्ति प्रमाण पत्र के आधार पर माइंस एरिया डेवलपमेंट अथारिटी (माडा) के तत्कालीन पदाधिकारियों ने भी जयप्रकाश खेतान को बहुमंजिली व्यवसायिक भवन निर्माण के लिए स्वीकृति दे दी थी।

इसके बाद खेतान ने उक्त जमीन पर व अन्य सटे सरकारी जमीन पर 48 फ्लैट का निर्माण कर रहे हैं और उसे लोगों को बेच भी रहे हैं।

लोकायुक्त के आदेश पर डीसी धनबाद ने सौंपी थी रिपोर्ट
लोकायुक्त के आदेश पर धनबाद के तत्कालीन उपायुक्त ने पूरे मामले की जांच कराकर इस घोटाले को पकड़ा था और इससे संबंधित रिपोर्ट लोकायुक्त को सौंपी थी। डीसी ने अपनी रिपोर्ट में गड़बड़ियों को उजागर किया था और शिकायतकर्ता की शिकायत को सही पाया था।

इधर, लोकायुक्त कार्यालय में अभी पूरे मामले की सुनवाई चल ही रही थी, उधर, उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल हजारीबाग के कमिश्नर ने 11 जनवरी 2017 को डीसी के आदेश को पलटते हुए आरोपितों के पक्ष में ही आदेश पारित कर दिया था।

लोकायुक्त ने सभी पक्षों को सुनने के बाद 22 अगस्त 2017 को अपना आदेश सुनाया था। लोकायुक्त ने अपने आदेश में लिखा था कि उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल हजारीबाग के आयुक्त ने अपने आदेश में कहीं भी प्रश्नगत भूमि के संबंध में किसी प्रकार की कोई चर्चा नहीं की और न ही अपना कोई स्वतंत्र मत निष्कर्ष पर पहुंचने से पूर्व अंकित किया था।

आयुक्त ने बिना किसी समीक्षा या स्वतंत्र मत के उपायुक्त धनबाद के उक्त आदेश को निरस्त कर दिया जो उचित नहीं है। इसके बाद ही लोकायुक्त ने राजस्व पर्षद के सदस्य से मंतव्य देने या अपेक्षित कार्रवाई की अनुशंसा की थी।

राजस्व पर्षद ने सुनवाई के दौरान कमिश्नर के आदेश को किया खारिज
राजस्व पर्षद के तत्कालीन सदस्य अमरेंद्र प्रताप सिंह ने 07 दिसंबर 2023 को अपने आदेश में प्रमंडलीय आयुक्त (कमिश्नर) के 11 जनवरी 2017 को आदेश को खारिज किया था। अपने आदेश में उन्होंने लोकायुक्त के आदेश की सराहना की थी कि उनकी सुनवाई में इतना बड़ा मामला उजागर हुआ।

राजस्व पर्षद सदस्य ने आदेश की कापी मुख्य सचिव, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव, सभी प्रमंडलीय आयुक्त, सभी उपायुक्त को भेजा था और ऐसे मामलों में आवश्यक कार्रवाई करने का आदेश दिया था।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry