यमुनानगर
पहाड़ों में लगातार हो रही वर्षा का असर यमुनानगर में दिखाई देने लगा है। शुक्रवार सुबह हथनीकुंड बैराज पर जलप्रवाह बढ़कर 50,675 क्यूसेक पहुंच गया, जो इस मानसून का सबसे अधिक बहाव है।
वहीं, सोम और पथराला नदियां भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। सोम नदी में 18 हजार और पथराला में आठ हजार क्यूसेक पानी दर्ज किया। सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन ने नदी किनारे के गांवों तथा संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। बैराज पर 80 हजार क्यूसेक जलप्रवाह होने पर बाढ़ जैसी स्थिति मानी जाती है।
30,366 क्यूसेक पानी यमुना नदी में छोड़ा, 72 घंटे में दिल्ली पहुंचेगा
कंट्रोल रूम के अनुसार शुक्रवार तड़के दो बजे हथनीकुंड बैराज पर 42,636 क्यूसेक जलप्रवाह था। सुबह चार बजे यह 35,688 क्यूसेक पर आ गया, पहाड़ों से लगातार पानी आने के कारण बहाव तेजी से बढ़ा और सुबह दस बजे 50,675 क्यूसेक तक पहुंच गया।
बैराज से 30,366 क्यूसेक पानी यमुना नदी में छोड़ा गया। यह 72 घंटे में दिल्ली पहुंच जाएगा। पश्चिमी यमुना नहर में 12,010 और पूर्वी यमुना नहर में 360 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। उत्तराखंड के डाकपत्थर बैराज से 50 हजार क्यूसेक अतिरिक्त पानी छोड़े जाने के बाद डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में भी चौकसी बढ़ा दी है।
सोम और पथराला नदी किनारे के गांवों, तटबंधों और निचले संपर्क मार्गों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। सिंचाई विभाग के अनुसार शुक्रवार सुबह आठ बजे से दोपहर तीन बजे तक लगातार आठ घंटे सोम नदी में 18 हजार क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया। ऐसा पहली बार हुआ।
औसत 76 एमएम वर्षा, दो जगह पेड़ गिरे
24 घंटे में औसतन 76 एमएम और 48 घंटे में 83 एमएम वर्षा दर्ज की। 92 एमएम वर्षा साढौरा व प्रतापनगर में 83 एमएम वर्षा हुई। टिबडियों गांव में 70 साल पुराना बरगद का पेड़ व व्यासपुर के पाबनी रोड पर कीकर का पेड़ गिर गया। यमुनानगर और जगाधरी के कई इलाकों में रात से दोपहर तक जलभराव रहा। कई घरों और दुकानों में पानी घुस गया, रेलवे अंडरपास और प्रमुख सड़कें घंटों बंद रहीं। बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से कई क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था भी बाधित रही।
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