विश्वविद्यालय परिसर में निर्माणाधीन ऑडिटोरियम का भी किया निरीक्षण, तेजी से कार्य पूर्ण करने के दिए निर्देश

उत्तर प्रदेश राज्य

गोरखपुर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार शाम प्रदेश के प्रथम महायोगी गुरु गोरखनाथ राज्य आयुष विश्वविद्यालय में नवनिर्मित बालक और बालिका छात्रावास का उद्घाटन किया। बालक छात्रावास का नामकरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गुरुदेव राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की स्मृति में हुआ है जबकि बालिका छात्रावास राप्ती नामाकृत है। छात्रावास के उद्घाटन अवसर पर सीएम योगी ने दोनों छात्रावासों के आवंटी चिकित्सक विद्यार्थियों को उनके कमरों की चाबी भी सौंपी। मुख्यमंत्री ने आयुष विश्वविद्यालय परिसर में निर्माणाधीन ऑडिटोरियम का भी निरीक्षण किया और निर्माण कार्यों में तेजी लाते हुए इसे शीघ्रता से पूर्ण करने के निर्देश दिए।

भटहट-बांसस्थान फोरलेन सड़क का भटहट मोड़ पर लोकार्पण करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आयुष विश्वविद्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने बालक और बालिका छात्रावास का उद्घाटन किया। छात्रावास का भ्रमण कर उन्होंने वहां उपलब्ध सुविधाओं की भी जानकारी ली। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने खिड़कियों पर जाली लगवाने, साफ सफाई की उत्कृष्ट व्यवस्था करने तथा मेस में गुणवत्तापूर्ण भोजन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने छात्रावास के आवंटी एमडी आयुर्वेद के विद्यार्थियों से भी आत्मीय संवाद किया। उन्होंने आयुर्वेद की उच्च शिक्षा को बेहतरीन अवसर बताते हुए विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। 

छात्रावास का उद्घाटन करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वविद्यालय परिसर में बन रहे ऑडिटोरियम के निर्माण कार्यों का जायजा लिया। कार्यदायी संस्था के अधिकारियों ने उन्हें अद्यतन प्रगति से अवगत कराया। ऑडिटोरियम के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने कार्यदायी संस्था से निर्माण कार्य में और तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण में गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखते हुए जल्द से जल्द इसे पूर्ण कर लिया जाए। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। आयुष विश्वविद्यालय में छात्रावास के उद्घाटन  अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. के रामचंद्र रेड्डी ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। 

उल्लेखनीय है कि आयुष विश्वविद्यालय, सीएम योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक है। उन्होंने इस विश्वविद्यालय का शिलान्यास 28 अगस्त 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों और लोकार्पण 1 जुलाई 2025 को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु के कर कमलों से कराया था।

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