लाडले को स्वस्थ देख परिजनों की आंखों में छलके खुशी के आंसू

छत्तीसगढ़ रायपुर

​रायपुर
  
कहते हैं कि अगर सही समय पर सही मदद मिल जाए, तो किसी के जीवन की डूबती कश्ती को भी किनारा मिल जाता है। छत्तीसगढ़ शासन की संवेदनशीलता और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत संचालित 'चिरायु योजना' धमतरी जिले के ग्राम सिंधौरीखुर्द निवासी 10 वर्षीय त्रिशांत यादव के लिए साक्षात वरदान साबित हुई है। चिरायु टीम की सतर्कता ने न सिर्फ एक मासूम को जन्मजात गंभीर बीमारी के चंगुल से छुड़ाया, बल्कि एक गरीब परिवार को जीवनभर का दर्द झेलने से भी बचा लिया।

​स्कूल में जांच के दौरान खुली बीमारी की परत
   ​
धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के सिंधौरीखुर्द का रहने वाला छात्र त्रिशांत रोज की तरह स्कूल जाता था। माता-पिता को अंदाजा भी नहीं था कि उनके लाडले के भीतर जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease – CHD) पनप रहा है। ​तभी स्कूलों में चल रहे नियमित स्वास्थ्य परीक्षण अभियान के तहत चिरायु टीम कुरूद त्रिशांत के स्कूल पहुंची। परीक्षण के दौरान डॉक्टरों ने त्रिशांत के दिल की धड़कनों में असमानता महसूस की। टीम ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए बिना देर किए परिजनों से संपर्क किया और उन्हें उच्च स्तरीय जांच की सलाह दी।

​जिला अस्पताल से रायपुर तक त्वरित एक्शन
     
​चिरायु टीम की संवेदनशीलता यहीं खत्म नहीं हुई। परिजनों की सहमति लेकर बच्चे को जिला अस्पताल धमतरी भेजा गया, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों ने पुष्टि की कि त्रिशांत के दिल में जन्मजात समस्या है और जल्द से जल्द ऑपरेशन जरूरी है।
    
​मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के मार्गदर्शन में चिरायु टीम ने कागजी प्रक्रियाओं और रेफरल को इतनी तेजी से पूरा किया कि बच्चे को बिना किसी रुकावट के रायपुर के प्रतिष्ठित एमएमआई (MMI) हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। बीते 8 जुलाई 2026 को विशेषज्ञ सर्जन्स की टीम ने त्रिशांत के दिल का सफल ऑपरेशन किया। आज वह पूरी तरह स्वस्थ है और डॉक्टरों की निगरानी में तेजी से सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।

पहचान से लेकर घर वापसी तक

    ​
इस पूरी सफलता की कहानी को चिरायु टीम ने इन पांच चरणों में अमलीजामा पहनाया। ​राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 'चिरायु टीम' की कार्यप्रणाली केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा का एक जीवंत सफरनामा है। इसकी शुरुआत समय पर पहचान से होती है, जहाँ टीम के डॉक्टर स्कूलों में आयोजित स्वास्थ्य शिविरों के दौरान बच्चों के भीतर छिपे शुरुआती लक्षणों को पूरी सतर्कता से पकड़ते हैं। बीमारी की आशंका होते ही टीम त्वरित परामर्श का मोर्चा संभालती है और परिजनों को बिना डराए, बेहद आत्मीयता के साथ बीमारी की गंभीरता समझाकर उन्हें आगे के इलाज के लिए मानसिक रूप से तैयार करती है।

परिजनों की सहमति मिलते ही शुरू होता है निःशुल्क रैफरल का सिलसिला, जिसके तहत धमतरी से लेकर रायपुर तक के इलाज की पूरी रूपरेखा तैयार की जाती है और तमाम कागजी औपचारिकताओं का पूरा जिम्मा चिरायु टीम खुद उठाती है, ताकि गरीब परिवार पर कोई बोझ न पड़े। इसी तत्परता का सुखद परिणाम 8 जुलाई 2026 को सफल सर्जरी के रूप में सामने आया, जब रायपुर के विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा मासूम का पूर्णतः निःशुल्क और कामयाब हार्ट ऑपरेशन किया गया। चिरायु का यह मिशन अस्पताल तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि ऑपरेशन के बाद सतत फॉलो-अप के जरिए डिस्चार्ज के बाद भी बच्चे की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की जाती है और उसके पूर्ण रूप से स्वस्थ होने तक सेहत की लगातार मॉनिटरिंग की जाती है।"

लाखों का इलाज मुफ़्त हुआ, सरकार ने बचा ली हमारे घर की खुशियां
    

​त्रिशांत के माता-पिता भावुक होकर बताते हैं कि हार्ट की बीमारी का नाम सुनकर ही हमारे पैर तले जमीन खिसक गई थी। हम ठहरे गरीब लोग, इतना महंगा इलाज हमारे बूते से बाहर था। अगर चिरायु की टीम स्कूल न आती, तो हमें कभी पता ही नहीं चलता। हम मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग को कोटि-कोटि धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने हमारे बच्चे को नया जीवन दिया और हमारे घर की खुशियां लौटा दीं।

​सिर्फ जांच नहीं, स्वस्थ भविष्य की गारंटी है 'आरबीएसके'
     ​
धमतरी जिले में चिरायु टीम का यह समर्पित प्रयास इस बात का जीवंत उदाहरण है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाएं सिर्फ फाइलों या जांच तक सीमित नहीं हैं। यह कार्यक्रम बच्चों में जन्मजात विकारों, बीमारियों की पहचान करने से लेकर उनके पूर्णतः ठीक होने तक एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहा है, जो छत्तीसगढ़ के नौनिहालों के सुरक्षित कल की मजबूत बुनियाद रख रहा है।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry