झारखंड शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर, नामांकन सुधरा लेकिन ड्रॉपआउट बढ़ा चिंता

राज्य

रांची
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी UDISE+Report 2025-26 की ताजा रिपोर्ट झारखंड की स्कूली शिक्षा व्यवस्था की एक मिश्रित तस्वीर पेश करती है।

रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में छठी कक्षा से लेकर 12वीं (प्लस टू) स्तर तक सकल नामांकन अनुपात (GER) में सुधार हुआ है, जो शिक्षा व्यवस्था के आगे बढ़ने का सकारात्मक संकेत है।

हालांकि, चिंता की बात यह है कि जैसे-जैसे कक्षाएं ऊपर की ओर बढ़ती हैं, बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर (ड्रॉपआउट रेट) में भारी वृद्धि होने लगती है और नामांकन का ग्राफ तेजी से गिरता है।

ऊपरी कक्षाओं में 40% तक घट जाता है नामांकन
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि प्राथमिक कक्षाओं (कक्षा 1 से 5) में सकल नामांकन अनुपात 90 प्रतिशत तक रहता है, लेकिन उच्च माध्यमिक स्तर (प्लस टू) तक पहुंचते-पहुंचते यह अनुपात लगभग 40 फीसदी तक घटकर महज 55 प्रतिशत पर आ जाता है।

हालांकि, पिछले सत्र की तुलना में इस बार उच्च प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक तीनों ही स्तरों पर जीईआर में आंशिक सुधार देखा गया है।

वर्षवार सकल नामांकन अनुपात (GER) का गणित
           शिक्षा का स्तर            सत्र 2024-25    सत्र 2025-26 (%)   स्थिति

    प्राथमिक (कक्षा 1-5)                93            90                    आंशिक कमी
    उच्च प्राथमिक (कक्षा 6-8)          83            85                     सुधार
    माध्यमिक (कक्षा 9-10)            73             76                     सुधार
    उच्च माध्यमिक (कक्षा 11-12)     49            55                     सुधार

माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर में भारी उछाल
कमोबेश यही चिंताजनक स्थिति बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर में भी देखने को मिलती है। प्राथमिक स्तर पर जहां स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या महज 0.1 प्रतिशत है, वहीं माध्यमिक स्तर (कक्षा 9वीं और 10वीं) पर यह दर तेजी से बढ़कर 6.6 प्रतिशत तक पहुंच जाती है।

स्कूल छोड़ने की दर (Dropout Rate) के आंकड़े:
      शिक्षा का स्तर    2024-25      2025-26 (%)

    प्राथमिक            0.0            0.1
    उच्च प्राथमिक      1.7            2.5
    माध्यमिक           3.5            6.6

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) का लक्ष्य और चुनौतियां
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP) के तहत सरकार ने वर्ष 2030 तक माध्यमिक स्तर तक शत-प्रतिशत (100%) सकल नामांकन अनुपात हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

रिपोर्ट के इन आंकड़ों से साफ संकेत मिलता है कि यदि झारखंड को इस लक्ष्य तक पहुंचना है, तो ऊपरी कक्षाओं में नामांकन बढ़ाने के साथ-साथ बच्चों के स्कूल छोड़ने के मूल कारणों की पहचान कर उनका त्वरित समाधान करना होगा

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry