MP के 70.62 लाख बच्चों में एनीमिया का खतरा, जंक फूड बना बड़ी वजह

राज्य

भोपाल.

अगर आप अपने बच्चों को चॉकलेट, चिप्स, बिस्कुट, दूध-ब्रेड या पिज्जा जैसी चीजें खिलाकर प्यार जताते हैं, तो यह खबर आपके लिए एक बड़ी चेतावनी है। मध्य प्रदेश में कराए गए एक बड़े स्वास्थ्य सर्वे में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि सूबे का लगभग हर दूसरा बच्चा एनीमिया (खून की कमी) से पीड़ित है।

डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चों के खानपान में फल और हरी सब्जियों की जगह इन जंक फूड और पैकेट बंद चीजों का बढ़ना ही इस बीमारी की मुख्य वजह है।

35.21 लाख बच्चे एनीमिया से पीड़ित
प्रदेशभर में हाल ही में चले दस्तक अभियान के तहत डिजिटल हीमोग्लोबिन मीटर की मदद से 5 साल तक के 70.62 लाख बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। इनमें से रिकॉर्ड 35.21 लाख बच्चे एनीमिया से पीड़ित पाए गए हैं. हालात कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 3,575 बच्चों की स्थिति इतनी नाजुक थी कि उन्हें तत्काल ब्लड ट्रांसफ्यूजन (खून चढ़ाना) करना पड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि एनीमिया केवल खून की कमी की बीमारी नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को भी पूरी तरह रोक देता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए अब 14 जुलाई से एक बार फिर दस्तक अभियान के नए चरण की शुरुआत की गई है, जो 31 अगस्त तक जारी रहेगा। स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमें घर-घर जाकर 5 साल से छोटे बच्चों की स्क्रीनिंग कर रही हैं. इस अभियान का उद्देश्य एनीमिया, कुपोषण, दस्त, निमोनिया और जन्मजात बीमारियों की समय पर पहचान करना है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत इलाज शुरू किया जा सके। इसके तहत बच्चों को आयरन सिरप, विटामिन-ए, ओआरएस और जरूरी दवाएं मौके पर ही उपलब्ध कराई जा रही हैं।

1. महिलाएं भी निशाने पर: 3.02 लाख पीड़ित व 10,660 की हालत अति गंभीर
यह संकट केवल बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि गर्भवती महिलाओं की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है. अभियान के दौरान 9.42 लाख गर्भवती महिलाओं की भी जांच की गई।

  • इस जांच में 3.02 लाख महिलाएं मध्यम से गंभीर एनीमिया से पीड़ित पाई गईं।
  • 10,660 महिलाओं में एनीमिया का स्तर 'अति गंभीर' पाया गया।
  • पीड़ित महिलाओं का इलाज आयरन-फॉलिक एसिड, आयरन सुक्रोज, फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज और आवश्यकतानुसार रक्तादान के जरिए किया जा रहा है।

2. DSS (डिसीजन सपोर्ट सिस्टम) से होगी लक्षणों की पहचान
इस बार अभियान को और अधिक हाईटेक बनाया गया है।

  • आशा, एएनएम और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के जरिए कुपोषण, निमोनिया और एनीमिया के शुरुआती लक्षणों को पहचानेंगी।
  • यदि किसी बच्चे या महिला की स्थिति गंभीर मिलती है, तो यह डिजिटल सिस्टम तुरंत उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्र या अस्पताल रेफर करने की सलाह देगा।
  • बच्चों की जरूरत के अनुसार उन्हें मौके पर ही आयरन सिरप, विटामिन-ए, ओआरएस, जिंक और अन्य आवश्यक उपचार दिए जा रहे हैं।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry