22 करोड़ वोटर्स डेटा चोरी का दावा, ट्रंप ने चीन को घेरा

दुनिया

नई दिल्ली
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर चीन पर बड़ा इल्जाम लगाया है। गुरुवार को ट्रंप ने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में एक बार फिर चीन की दखलअंदाजी का दावा किया। उन्होंने इसे साबित करने के लिए कुछ संवेदनशील खुफिया दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की बात कही है। खास बात यह है कि ट्रंप का यह दावा अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के दावे के बिल्कुल उलट है। खुफिया एजेंसियों ने साफ किया था कि 2020 के चुनावों में चीन की दखलंदाजी के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं।

बता दें कि ट्रंप का यह 25 मिनट का संबोधन आगामी नवंबर में होने वाले मिडटर्म इलेक्शन से ठीक पहले आया है। इन चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के सामने संसद के दोनों सदनों में अपना बहुमत बचाने की बड़ी चुनौती है। इससे पहले ट्रंप ने चुनावी धांधली को लेकर एक बात फिर बहस छेड़ दी है।

चीन ने चुराया 22 करोड़ वोटर्स का डेटा
डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि उनके द्वारा सार्वजनिक की गई संवेदनशील जानकारियों से पता चलता है कि चीन ने अवैध रूप से 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं की फाइलें हासिल कर ली थीं। ट्रंप के मुताबिक इन फाइलों में मतदाताओं के नाम, पते और वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाला अन्य डेटा शामिल था। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी से जुड़े लोगों ने चीन की इन गतिविधियों की गंभीरता से जुड़ी जानकारियों को जानबूझकर दबाया और छिपाया।

चीन ने खारिज किया दावा
ट्रंप के इस भाषण से पहले ही चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू चांग ने अपनी प्रतिक्रिया में साफ कहा, "चीन ने अमेरिका के राष्ट्रपति चुनावों में कभी हस्तक्षेप नहीं किया है और न ही कभी करेगा।" हालांकि ट्रंप के इस कदम से दोनों देशों के उन रिश्तों में फिर से खटास आने का खतरा पैदा हो गया है। इससे पहले पिछले साल ट्रेड वॉर के बाद संबंध अभी पटरी पर लौटने के संकेत मिले थे। ट्रंप बीते दिनों व्यापार संबंधों को सुधारने के लिए खुद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने चीन भी पहुंचे थे। हालांकि अब उनके इस दावे से बात बिगड़ सकती है।

दूसरी तरफ, अमेरिकी डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्यों ने भी ट्रंप का दावा खारिज किया है। हाउस परमानेंट सेलेक्ट कमेटी ऑन इंटेलिजेंस के डेमोक्रेटिक सदस्यों ने कार्यवाहक राष्ट्रीय खुफिया निदेशक बिल पुल्टे, FBI, CIA और NSA के प्रमुखों को एक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने चेतावनी दी कि ट्रंप को चुनावी सुरक्षा के बारे में झूठे दावों का समर्थन करने के लिए खुफिया जानकारियों को हथियार बनाने की अनुमति न दी जाए। सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने भी आरोप लगाया कि इसके जरिए ट्रंप सरकार नवंबर के चुनावों में हेरफेर करने की कोशिश कर सकता है।

चुनावों पर कंट्रोल बढ़ाने की कोशिश
गौरतलब है कि जनवरी 2025 में दोबारा सत्ता में लौटने के बाद से ही ट्रंप चुनावों पर केंद्रीय नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रंप हाल के महीनों में सीनेट के रिपब्लिकन सदस्यों पर 'सेव अमेरिका एक्ट' पारित करने का भी दबाव बना रहे हैं। इस कानून के तहत वोट देने के लिए फोटो आईडी और रजिस्ट्रेशन के लिए अमेरिकी नागरिकता का प्रमाण देना अनिवार्य होगा। साथ ही राज्यों को वोटर रजिस्ट्रेशन की जानकारी संघीय सरकार के साथ साझा करनी होगी। हालांकि, डेमोक्रेट्स और वोटिंग राइट्स कार्यकर्ताओं का कहना है कि वोटर फ्रॉड बेहद दुर्लभ है और यह कानून वैध वोटों को दबाने का काम करेगा।

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