बिना आम चुनाव मिला PM पद, ब्रिटेन में एंडी बर्नहैम की ताजपोशी कैसे हुई? समझिए पूरी प्रक्रिया

दुनिया

लंदन 
ब्रिटेन में एक बार फिर ऐसा होने जा रहा है, जो कई देशों में मुमकिन नहीं है. यहां कोई नया चुनाव नहीं हुआ, किसी ने वोट नहीं डाला, लेकिन देश को नया प्रधानमंत्री मिल गया. लेबर पार्टी के वरिष्ठ नेता और मैनचेस्टर के पूर्व मेयर एंडी बर्नहैम सोमवार को आधिकारिक तौर पर ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री का पद संभालेंगे। 

बर्नहैम मौजूदा प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर की जगह लेंगे. स्टार्मर ने पिछले महीने लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया था. इसके बाद पार्टी के भीतर नए नेता के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई. इस मुकाबले में बर्नहैम इकलौते उम्मीदवार रहे, जिन्हें लेबर पार्टी के 401 सांसदों में से 349 का समर्थन मिला। 

ब्रिटेन की संसदीय व्यवस्था में प्रधानमंत्री का चुनाव सीधे जनता नहीं करती. आम चुनाव में लोग सांसद चुनते हैं. जिस पार्टी को संसद में बहुमत मिलता है, उसका नेता ही प्रधानमंत्री बनता है. अगर कार्यकाल के बीच पार्टी अपना नेता बदल देती है, तो नया नेता बिना आम चुनाव कराए सीधे प्रधानमंत्री बन सकता है। 

किएर स्टार्मर सोमवार को इस्तीफा देंगे
किएर स्टार्मर सोमवार को पहले किंग चार्ल्स तृतीय से मुलाकात कर औपचारिक रूप से इस्तीफा देंगे. इसके बाद एंडी बर्नहैम बकिंघम पैलेस पहुंचेंगे, जहां राजा उन्हें नई सरकार बनाने का न्योता देंगे. इस औपचारिक प्रक्रिया के बाद वह ब्रिटेन के 59वें प्रधानमंत्री बन जाएंगे और 10 डाउनिंग स्ट्रीट पहुंचकर अपना पहला संबोधन देंगे। 

किएर स्टार्मर क्यों दे रहे इस्तीफा?
स्टार्मर ने जून में इस्तीफे की घोषणा की थी. उनके कार्यकाल के दौरान कई राजनीतिक विवाद सामने आए. खास तौर पर अमेरिका में ब्रिटेन के राजदूत के रूप में जेफ्री एपस्टीन से जुड़े व्यक्ति की नियुक्ति को लेकर उनकी काफी आलोचना हुई. मई में स्थानीय निकाय चुनावों में लेबर पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद भी पार्टी के भीतर उनके खिलाफ दबाव बढ़ गया था। 

दिलचस्प बात यह है कि पिछले एक दशक में ब्रिटेन के अधिकांश प्रधानमंत्री इसी तरह पार्टी के अंदर नेतृत्व परिवर्तन के जरिए सत्ता में आए हैं. थेरेसा मे, बोरिस जॉनसन, लिज ट्रस और ऋषि सुनक भी बिना नए आम चुनाव के प्रधानमंत्री बने थे. अब एंडी बर्नहैम इस सूची में शामिल होने वाले सातवें प्रधानमंत्री होंगे. उनकी नियुक्ति एक बार फिर दिखाती है कि ब्रिटेन की संसदीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार बदलने के लिए हर बार आम चुनाव कराना जरूरी नहीं होता। 

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