चंडीगढ़ बनेगा BRICS हेल्थ समिट का केंद्र, 22 जुलाई से सार्वजनिक स्वास्थ्य, मेंटल हेल्थ और महामारी पर होगी बड़ी बैठक

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चंडीगढ़

चंडीगढ़ 22 से 24 जुलाई तक BRICS 2026 हेल्थ मीटिंग्स की मेजबानी करने जा रहा है। इस हाई-लेवल बैठक में BRICS सदस्य देशों के स्वास्थ्य मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और शीर्ष चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल होंगे। चंडीगढ़ में होने जा रहे ब्रिक्स स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। सम्मेलन के सत्र होटल द ललित और होटल हयात में आयोजित होंगे। होटल ललित में ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधि और स्वास्थ्य विशेषज्ञ, जबकि हयात में पार्टनर सदस्य देशों के प्रतिनिधि ठहरेंगे।

सम्मेलन को देखते हुए प्रशासन, पुलिस और नगर निगम ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। वीवीआईपी रूट और सम्मेलन स्थलों पर सड़क मरम्मत, सफाई, स्ट्रीट लाइट, हॉर्टिकल्चर और ट्रैफिक प्रबंधन के कार्य प्राथमिकता से कराए जा रहे हैं। डीसी कार्यालय ने विभिन्न अधिकारियों की ड्यूटी भी तय करनी शुरू कर दी है। 

इस अवसर पर BRICS की ओर से 59 सेकेंड का एक वीडियो भी जारी किया गया है, जिसमें चंडीगढ़ की खूबसूरती और प्रमुख विशेषताओं को दिखाया गया है।

बिक्स की तरफ से जारी की गई जानकारी।

बिक्स की तरफ से जारी की गई जानकारी।

अब तीन प्वाइंटों में जाने मीटिंग में क्या रहेगा

    5 बड़े मुद्दों पर फोकस: बैठक में ट्रेडिशनल (पारंपरिक) मेडिसिन, डिजिटल हेल्थ, मेंटल हेल्थ (मानसिक स्वास्थ्य), हेल्दी लाइफस्टाइल और पब्लिक हेल्थ जैसे अहम मुद्दों पर गंभीर चर्चा होगी।

    इंटीग्रेटिव मेडिसिन को बढ़ावा: आधुनिक इलाज के साथ-साथ पारंपरिक और वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों को एक साथ मिलाकर काम करने की रणनीति तैयार की जाएगी।

    भविष्य की महामारियों से निपटने का प्लान: ब्रिक्स देश मिलकर एक ऐसा टिकाऊ और इनोवेटिव हेल्थ सिस्टम बनाने पर काम कर रहे हैं, जो भविष्य में किसी भी स्वास्थ्य संकट या महामारी का मजबूती से सामना कर सके।

क्यों अहम है यह बैठक
यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसके माध्यम से BRICS देश डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल रिसर्च और महामारी से निपटने की तैयारियों में आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे।

PGIMER जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की मौजूदगी के कारण चंडीगढ़ को इस अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य चर्चा का अहम केंद्र माना जा रहा है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल माध्यम से आम लोगों तक अधिक तेज और आसान तरीके से पहुंचाने की दिशा में नए अवसर खुल सकते हैं।

भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। सम्मेलन का विषय लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता रखा गया है। इसमें हेल्दी लाइफस्टाइल, मानसिक स्वास्थ्य, टीबी उन्मूलन, डिजिटल हेल्थ, स्वास्थ्य अनुसंधान, पारंपरिक चिकित्सा, महामारी से निपटने की तैयारी और सदस्य देशों के बीच तकनीक व अनुभव साझा करने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। यह सम्मेलन भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत तय प्राथमिकताओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इस बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया के वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और प्रतिनिधि सार्वजनिक स्वास्थ्य में सहयोग के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर विचार-विमर्श करने के लिए एकत्रित हुए।

भारत, 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता करते हुए, 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग एवं स्थिरता के लिए निर्माण' के व्यापक विषय से निर्देशित है, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2025 रियो शिखर सम्मेलन में व्यक्त किए गए जन-केंद्रित एवं मानवता-प्रथम दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह विषय उत्तरदायी, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार सहयोगी संरचना को मजबूत करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने सभी ब्रिक्स सदस्य देशों का स्वागत किया और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य कार्य समूह के महत्व को प्रमुख मंच के रूप में रेखांकित किया।

उन्होंने कहा था कि हाल के वर्षों में ब्रिक्स स्वास्थ्य कार्य समूह की बैठकों ने संक्रामक और गैर-संक्रामक रोगों सहित स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौतियों से निपटने, स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने एवं सस्ती दवाओं तक पहुंच में सुधार लाने के लिए सहयोग का मार्ग प्रशस्त किया है। इन प्रयासों से महामारी की तैयारी, स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी नवाचार एवं सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को बढ़ावा देने में सहयोग को मजबूती प्राप्त हुई है।

अपने 2026 अध्यक्षता के अंतर्गत भारत की प्राथमिकताओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा था कि स्वास्थ्य कार्य समूह का उद्देश्य समावेशी, स्थायी एवं साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सहयोग को बढ़ावा देना है, जबकि ब्रिक्स देशों की विविध स्वास्थ्य प्रणालियों और सामाजिक-आर्थिक संदर्भों को मान्यता प्रदान करना भी है। उन्होंने अनुकूलन क्षमता, आपसी सीख एवं सामूहिक विशेषज्ञता का लाभ उठाने की महत्वता पर बल दिया ताकि व्यापक और प्रभावशाली स्वास्थ्य मध्यवर्तन डिजाइन किए जा सके। 

 

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