बिहार विधानसभा में शिक्षा मुद्दा, शिक्षकों की भर्ती का ऐला

राज्य

पटना
 बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को राज्य की शिक्षा व्यवस्था, विशेषकर डॉ. भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी का मुद्दा सदन में प्रमुखता से उठा।

सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सदस्यों ने स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पद, आधारभूत सुविधाओं की कमी और बच्चों की पढ़ाई की गुणवत्ता पर सवाल उठाए।

जवाब में मुख्यमंत्री ने इसे गंभीर मामला बताते हुए शिक्षा विभाग को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए, जबकि शिक्षा मंत्री ने अगले पांच वर्षों में एक लाख शिक्षकों की नियुक्ति का रोडमैप रखा।

जदयू विधायक ने उठाया शिक्षकों की कमी का मुद्दा
जदयू विधायक श्याम रजक ने सदन में कहा कि राज्य के डॉ. बीआर आंबेडकर विद्यालयों में करीब 62 प्रतिशत शिक्षकों के पद खाली हैं।

उन्होंने सवाल किया कि जब अधिकांश पद रिक्त हैं तो इन विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे संभव होगी। उन्होंने सरकार से रिक्त पदों को भरने की समय-सीमा तय करने की मांग भी की।

मंत्री ने बताई वर्तमान स्थिति
प्रश्न का उत्तर देते हुए संबंधित मंत्री लखेंद्र कुमार ने बताया कि राज्य में वर्तमान में 91 डॉ. बीआर आंबेडकर विद्यालय संचालित हैं। इनमें कुल 3,456 शिक्षक कार्यरत हैं।

उन्होंने बताया कि माध्यमिक स्तर पर 1,456 और उच्च माध्यमिक स्तर पर 950, यानी कुल 2,406 स्वीकृत पद हैं, जिनमें फिलहाल 1,290 शिक्षक कार्यरत हैं।

शेष रिक्त पदों को भरने के लिए टीआरई-4 (TRE-4) के तहत रिक्तियों का प्रस्ताव बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) को भेजा गया है।

मुख्यमंत्री बोले- मामला गंभीर, एक महीने में होगी व्यवस्था
शिक्षकों की कमी पर मुख्यमंत्री ने स्वयं हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यह अत्यंत गंभीर विषय है और विधायक की चिंता पूरी तरह उचित है।

मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि जहां तत्काल नियुक्ति संभव नहीं है, वहां प्रतिनियुक्ति के आधार पर एक महीने के भीतर शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

विपक्ष ने शिक्षा व्यवस्था पर उठाए बड़े सवाल
राजद विधायक कुमार सर्वजीत ने राज्य की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि छठी कक्षा तक पहुंचने वाले बच्चों को एबीसीडी तक नहीं आती।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई विद्यालयों में केवल दो कमरों में एक-एक हजार बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर विमर्श के लिए सभी विधायकों की सेंट्रल हॉल में विशेष बैठक बुलाई जाए।

ताकि यह समीक्षा हो सके कि बिहार के गरीब परिवारों के बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से क्यों वंचित हैं। उन्‍होंने नीतीश कुमार के जल जीवन हरियाली म‍िशन की चर्चा इस संदर्भ में की।

हाईस्कूलों के लिए जमीन की समस्या भी उठी
सदन में यह मुद्दा भी सामने आया कि सरकार ने सभी पंचायतों में हाईस्कूल खोलने का निर्णय लिया था, लेकिन 600 से 700 विद्यालय ऐसे हैं जहां अब तक भूमि उपलब्ध नहीं हो सकी।

ऐसी जगहों पर अस्थायी व्यवस्था के तहत स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। जिन विद्यालयों के लिए जमीन उपलब्ध नहीं है, वहां छह महीने के भीतर भूमि उपलब्ध करा दी जाएगी।

शिक्षा मंत्री का बड़ा ऐलान
चर्चा के अंत में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सदन को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार अगले पांच वर्षों में एक लाख शिक्षकों की नियुक्ति करेगी।

उन्होंने बताया कि टीआरई-4 भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए इस महीने के अंतिम सप्ताह में बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) को रिक्तियों का प्रस्ताव भेज दिया जाएगा।

सरकार का लक्ष्य रिक्त पदों को जल्द भरकर विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करना है। 

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry