भोपाल की शाहपुरा झील बचाने के लिए NGT का सख्त आदेश, 3 हफ्ते में कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी

मध्य प्रदेश राज्य

भोपाल
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सेंट्रल बेंच ने भोपाल की मशहूर शाहपुरा झील को लेकर बड़ा आदेश जारी किया है। ट्रिब्यूनल ने साफ किया है कि शाहपुरा झील एक नोटिफाइड वेटलैंड है। इसलिए इस पर 'वेटलैंड रूल्स 2017' लागू होंगे, जिसके तहत फुल टैंक लेवल से 50 मीटर तक का दायरा नो-कंस्ट्रक्शन बफर जोन रहेगा।

अदालत ने भोपाल मास्टर प्लान-2005 के 33 मीटर वाले नियम को दरकिनार करते हुए स्पष्ट किया कि वेटलैंड रूल्स ही मान्य होंगे। जस्टिस शेव कुमार सिंह और एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने प्रशासन को 3 हफ्ते में अतिक्रमण पर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।

बारिश से पहले हटेगी झील किनारे जमा सिल्ट
एनजीटी ने भोपाल कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर को निर्देश दिया है कि झील के किनारों पर डंप की गई सिल्ट को एक हफ्ते के भीतर हटाया जाए। कोर्ट ने चिंता जताई कि मानसून के दौरान यह कचरा दोबारा पानी में बहकर झील को प्रदूषित कर सकता है।

इसके साथ ही ट्रिब्यूनल ने किसी भी तरह के अवैध निर्माण पर तुरंत रोक लगाने और झील में बिना ट्रीट किया हुआ गंदा पानी गिरने से रोकने की सख्त ताकीद की है।

मीडिया रिपोर्ट और याचिका पर हुई सुनवाई
यह पूरा मामला एक मीडिया रिपोर्ट पर लिए गए स्वतः संज्ञान और पर्यावरण कार्यकर्ता नितिन सक्सेना की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ता और अधिवक्ता हरप्रीत सिंह गुप्ता ने कोर्ट में झील के बफर जोन में अतिक्रमण, अधूरी सफाई और सीवेज के पानी के मिलने का मुद्दा उठाया था।

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की रिपोर्ट पर उठा सवाल
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के जॉइंट डायरेक्टर ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंपी अपनी रिपोर्ट में माना था कि मौजूदा सीमांकन में झील के वास्तविक फैलाव और बफर जोन की सही स्थिति नहीं दिखती। एनजीटी ने इसी उलझन को सुलझाते हुए वेटलैंड रूल्स को प्राथमिकता दी है। अब 2 सितंबर को होने वाली सुनवाई पर राजधानी के पर्यावरण प्रेमियों की नजर रहेगी।

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