रांची
राज्य में अब तक करीब 350 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से करीब 25 फीसदी कम है. इसका असर अब डैमों पर भी दिखने लगा है. तेनुघाट, कोनार और तिलैया समेत अधिकांश डैमों में पानी का स्तर सामान्य से कम है. केंद्रीय जल आयोग राज्य के छह प्रमुख जलाशयों की निगरानी करता है. आयोग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, हाल के दिनों में मॉनसूनी बारिश से जलस्तर में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन इन डैमों में उपलब्ध पानी अब भी पिछले 10 वर्षों के औसत से करीब 19 फीसदी कम है. पंचेत डैम की स्थिति सबसे बेहतर, जबकि तिलैया डैम की स्थिति सबसे खराब है.
राज्य के प्रमुख जलाशयों की स्थिति
राज्य के छह प्रमुख जलाशयों (तेनुघाट, मैथन, पंचेत, कोनार, तिलैया और गेतलसूद) में अलग अलग स्थिति देखने को मिल रही है. सबसे बेहतर स्थिति पंचेत हिल जलाशय की है. तेनुघाट की क्षमता 0.821 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीक्यूएम) जल संग्रहण की है. इसकी तुलना में यहां 0.268 बीक्यूएम पानी है. वहीं, मैथन की क्षमता 0.471 बीक्यूएम की है. इसकी तुलना में यहां 0.240 बीक्यूएम पानी है. पंचेत डैम की कुल संग्रहण क्षमता 0.184 बीक्यूएम है. इसकी तुलना में यहां अभी 0.135 बीक्यूएम पानी है. कोनार की क्षमता 0.176 बीक्यूएम है. यहां अभी 0.049 बीक्यूएम पानी है. तिलैया में 0.142 बीक्यूएम क्षमता है, वहीं यहां पानी 0.119 बीक्यूएम है.
झारखंड के प्रमुख जलाशयों की स्थिति
डैम क्षमता वर्तमान स्थिति पिछले साल
तेनुघाट 0.821 0.268 0.224
मैथन 0.471 0.240 0.236
पंचेत हिल 0.184 0.135 0.100
कोनार 0.176 0.049 0.050
तिलैया 0.142 0.021 0.115
गेतलसूद 0.218 0.119 0.178
नोट: पानी की क्षमता बिलियन क्यूबिक मीटर (बीक्यूएम) में दी गई है.
214 मेगावाट हुआ बिजली का उत्पादन, सिंचाई क्षमता बढ़ी
डैमों में जल संवाहण की इस क्षमता का असर भी हो रहा है. इस मॉनसून मे गेतलसूद में पानी की वर्तमान क्षमता से करीब 130 मेगावाट बिजली का उत्पादन हुआ है. वहीं, तिलैया से करीब चार मेगावाट तथा पंचेत से 80 मेगावाट बिजली का उत्पादन हुआ है. इसी तरह मैथन में जल संवाहण की वर्तमान क्षमता से करीब 342 हेक्टेयर में सिंचाई क्षमता की वृद्धि होगी.
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad
