लखनऊ
शहरों में सुगम यातायात के लिए छह हजार से अधिक सिटी बसों की जरूरत है, लेकिन इसके सापेक्ष सिर्फ 740 बसें ही सड़कों पर दौड़ रही हैं। बसों की कमी को कुछ हद तक पूरा करने के लिए दिसंबर से महानगरों को 1225 नई इलेक्ट्रिक बसें मिलने की उम्मीद है। इनमें सबसे अधिक 300 बसें लखनऊ को मिलने वाली हैं जिनके लिए 29 जुलाई को टेंडर खोला जाएगा।
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय का मानक है कि प्रति एक लाख की आबादी पर 30 सिटी बसों का संचालन होना चाहिए। नगर विकास प्राधिकरण ने प्रदेश सरकार को प्रस्ताव भेजा था कि प्रदेश के 18 नगर निगमों में छह हजार बसों की जरूरत है इनमें, 1225 बसें तत्काल उपलब्ध कराना होगा।
27 जनवरी को मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में निधि प्रबंधन समिति की 16वीं बैठक में 1225 नई वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों की खरीद को स्वीकृति भी दी गई थी। संयुक्त निदेशक जयदीप वर्मा ने बताया कि इसी साल बसें मिलना शुरू हो जाएंगी।
अब जीसीसी के आधार पर होगा संचालन
नगरीय परिवहन प्राधिकरण का एनसीसी (नेट कास्ट कांट्रैक्ट) माडल फेल हुआ तो जीसीसी (ग्रास कास्ट कांट्रैक्ट) का माडल अपनाया जा रहा है। एनसीसी माडल के तहत लखनऊ और कानपुर में 100-100 बसें चलाना था। इसमें बस, ड्राइवर, कंडक्टर, किराया और बस का मेंटीनेंस सब इलेक्ट्रिक बस स्वामी को वहन करना था।
एनसीसी के टेंडर में कोई नहीं आया, तब कैबिनेट ने बस खरीदने की जगह किराये पर चलाने का निर्णय लिया तो जीसीसी माडल फिर लागू किया गया है। इसमें बस, ड्राइवर वाहन स्वामी का होगा। बस खरीदने के लिए सरकार 35 से 40 लाख रुपये अनुदान देगी व परिवहन निगम की तरह प्रति किलोमीटर का भुगतान होगा। इसमें कंडक्टर सिटी ट्रांसपोर्ट का होगा।
इन नगर निगमों को मिलेंगी बसें : आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, नोएडा, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी।
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