हरियाणा में फसल बीमा योजना का विस्तार, प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान होगा कवर

राज्य

चंडीगढ़
 सरकार ने खरीफ 2026 से रबी 2026-27 तक प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। पूरे प्रदेश में क्लस्टर आधारित व्यवस्था लागू रखते हुए फसलल बीमा, बीमा राशि, प्रीमियम दरें, बीमा इकाई और दावों के निपटान संबंधी प्रविधान तय किए हैं। खरीफ में धान, बाजरा, मक्का, कपास और मूंग तो रबी में गेहूं, जौ, चना, सरसों और सूरजमुखी की फसलें अधिसूचित की गई हैं।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की अधिसूचना के अनुसार योजना सभी ऋणी और गैर-ऋणी किसानों के लिए वैकल्पिक रहेगी। जो किसान योजना से बाहर रहना चाहते हैं, उन्हें नामांकन की अंतिम तिथि से कम से कम सात दिन पहले निर्धारित घोषणा पत्र जमा करना होगा।

गैर-ऋणी किसान स्वयं या कामन सर्विस सेंटर (सीएससी) के जरिये आवेदन कर सकेंगे। योजना के तहत सूखा, बाढ़, जलभराव, कीट एवं रोग प्रकोप, ओलावृष्टि, तूफान जैसी व्यापक प्राकृतिक आपदाओं के अलावा स्थानीय आपदाओं तथा कटाई के बाद अधिकतम दो सप्ताह तक होने वाले ओलावृष्टि, चक्रवाती वर्षा और बेमौसम बारिश से हुए नुकसान को भी कवर किया जाएगा। स्थानीय आपदा से हुए नुकसान की सूचना किसानों को 72 घंटे के भीतर कृषि रक्षक पोर्टल एवं हेल्पलाइन 14447 या क्राप लास मोबाइल ऐप के माध्यम से दर्ज कराया जा सकेगा।

यह होगी फसलवार बीमित और प्रीमियम की राशि
प्रदेश सरकार ने खरीफ 2026 से रबी 2026-27 तक 90% इंडेम्निटी लेवल यथावत रखा है। प्रति हेक्टेयर बीमित राशि धान के लिए 1 लाख 11 हजार 561 रुपये, कपास के लिए 1 लाख 14 हजार 136 रुपये, गेहूं के लिए 84 हजार 386 रुपये, सरसों के लिए 56 हजार 639 रुपये, चने की फसल के लिए 41 हजार 478 रुपये, जौ के लिए 53 हजार 779 रुपये, मक्का और सूरजमुखी 57 हजार 211 रुपये तथा मूंग 50 हजार 59 रुपये निर्धारित की गई है। किसानों का प्रीमियम रबी फसलों के लिए 1.50 प्रतिशत, खरीफ फसलों के लिए 2 प्रतिशत तथा कपास के लिए 5 प्रतिशत रहेगा।

 

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