बुलंदशहर हादसा: पांच दिनों की तलाश के बाद मिली मासूम चारू की लाश

उत्तर प्रदेश राज्य

बुलंदशहर
यूपी के बुलंदशहर के मामन रोड स्थित भूतेश्वर मंदिर के निकट नाले में तेज बहाव के साथ बह गई कक्षा चार की छात्रा चारू कश्यप की लाश आखिरकार मिल गई। शनिवार को हादसे के पांचवें दिन काली नदी में गांव चावली के निकट बरामद हो गया। हादसे के स्थल से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर शव बरामद हुआ है। जलकुंभी में फंसा होने के कारण शव पांचवें दिन बरामद हुआ है। इस परिजनों में कोहराम मच गया और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

जिस बेटी के सकुशल लौटने की उम्मीद में परिजन पिछले पांच दिनों से हर पल इंतजार कर रहे थे, वह उम्मीद शनिवार को टूट गई। उफनते नाले में बही छात्रा चारू का शव काली नदी में जलकुंभी के बीच फंसा मिला। पांच दिनों से चारू के लापता रहने के कारण परिवार का रो-रोकर बुरा हाल था और पूरे जिले की निगाहें रेस्क्यू अभियान पर टिकी थीं।

लाश मिलने से परिवार की टूटी उम्मीद
शनिवार सुबह शव मिलने की खबर के साथ ही परिवार की सारी उम्मीदें खत्म हो गईं और घर में मातम छा गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सीओ सिटी प्रखर पांडेय ने बताया कि नाले में बही छात्रा की लाश घटनास्थल से करीब तीन किलोमीटर दूर, काली नदी में गांव चावली के पास बरामद हुआ है। प्रारंभिक जांच के अनुसार लाश जलकुंभी में फंसा था।

पैर फिसलने से नाले में बही थी चारू
गौरतलब है कि मंगलवार दोपहर को स्कूल से लौटने के दौरान तेज बारिश से बचने के लिए चारू कश्यप एक दुकान पर खड़ी हो गई थी। अचानक पैर फिसलने से छात्रा उफनते नाले में बह गई। उसके बाद से ही छात्रा की तलाश में जिला प्रशासन, नगर पालिका, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पीएसी और अन्य विभागों की टीमें जुटी थीं। कई दिनों तक नालों और काली नदी में व्यापक स्तर पर सर्च अभियान चलाया गया। वहीं, छात्रा के पिता रिंकू की तहरीर पर स्कूल की प्रधानाचार्य, प्रबंधक और आया के खिलाफ लापरवाही का मुकदमा भी दर्ज कराया था।
चार अधिकारियों पर गिरी थी गाज

इस मामले में डीएम कुमार हर्ष ने नगर पालिका के लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति शासन से की थी। शासन ने इस मामले में नगर पालिका में तैनात दो सफाई निरीक्षक और दो अवर अभियंताओं को निलंबित कर दिया गया था।

लगता है कि बेटी घर आने वाली है: मां
चारू की मां ज्ञानवती ने रुंधे गले से बताया था, ‘बेटी बगैर मेरा घर खाली है। लगता है बेटी आने वाली है। मुझे रात को नींद भी नहीं आती है। रातभर जागती हैं। नाला ढका होता तो मेरी बेटी बच जाती। पटिया समझकर आगे बैढ़ गई। जैसे ही उसने पैर रखा सीधे नाले में चली गई।’

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