यूक्रेनी ड्रोन अटैक से दहला रूस, तेल रिफाइनरी में आग, दो लोगों की मौत

दुनिया

कीव
रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग अब विनाशकारी मोड़ ले चुका है। दोनों देश एक दूसरे पर ताबड़तोड़ हमला कर रहे हैं। इस बीच यूक्रेनी सेना ने स के सारातोव क्षेत्र में रोसनेफ्ट पीजेएससी की प्रमुख तेल रिफाइनरी पर जोरदार ड्रोन हमला किया। हमले के कारण रिफाइनरी में भीषण आग लग गई। यूक्रेन के जनरल स्टाफ ने टेलीग्राम पर जारी आधिकारिक बयान में इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यूक्रेनी बलों ने अपने दुश्मन की ईंधन उत्पादन क्षमता को लगभग रोजाना निशाना बनाने की रणनीति के तहत यह हमला किया।

जनरल स्टाफ के अनुसार, यूक्रेनी सेना ने मॉस्को से करीब 730 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व और कीव से 1000 किलोमीटर से अधिक पूर्व स्थित सारातोव क्षेत्र के एंगेल्स एयरफील्ड पर भी एक साथ हमला बोला। एंगेल्स एयरबेस रूसी वायु सेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण ऑपरेटिंग हब माना जाता है। यहां Tu-95 लंबे दूरी के रणनीतिक बमवर्षक विमान तैनात हैं, जिनका इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ क्रूज मिसाइल हमले करने के लिए नियमित रूप से किया जाता रहा है।

क्षेत्रीय अधिकारियों ने बताया कि हमले के बाद सारातोव और एंगेल्स शहरों में सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी नुकसान पहुंचा है। इस हमले में दो नागरिकों की मौत हो गई है। नासा के फायर इन्फॉर्मेशन फॉर रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम द्वारा रविवार को ली गई सैटेलाइट तस्वीरों में सारातोव रिफाइनरी के आसपास नई गर्मी संबंधी गड़बड़ियां साफ नजर आ रही हैं, जो सक्रिय आग का संकेत दे रही हैं।

बता दें कि यह हमला जुलाई के अंतिम दिनों में यूक्रेन द्वारा रूस की तेल रिफाइनरियों पर तेज किए गए हमलों की श्रृंखला का हिस्सा है। पिछले कुछ हफ्तों की सापेक्ष शांति के बाद यूक्रेन ने सीमा से दूर स्थित रूसी ऊर्जा सुविधाओं को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को कीव ने रूस की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक पर हमला किया था, जबकि शनिवार को बश्कोर्तोस्तान गणराज्य के उफा शहर को निशाना बनाया गया, जहां तीन बाशनेफ्ट रिफाइनरियां स्थित हैं।

बश्कोर्तोस्तान के प्रमुख रादिय खाबिरोव ने रविवार को बताया कि गणराज्य की औद्योगिक सुविधाओं पर एक और बड़ा ड्रोन हमला हुआ। उन्होंने बिना ज्यादा डिटेल दिए कहा कि उफा के एक औद्योगिक क्षेत्र में आग लग गई है। इन हमलो से रूस की ईंधन आपूर्ति व्यवस्था पर फिर से दबाव बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। इससे पहले देश के कई इलाकों में पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर लिमिट लगाई गई थी या कमी के बाद उन्हें हटाया गया था। बता दें कि सारातोव रिफाइनरी की क्षमता रोजाना लगभग 1 लाख 40 हजार बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस करने की है। इस पर इससे पहले 8 जुलाई को भी हमला हुआ था। उस हमले के बाद रिफाइनरी ने कुछ समय बाद काम फिर से शुरू कर दिया था।

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