Malaria Alert: संवेदनशील क्षेत्रों में स्वास्थ्य महकमे की सघन निगरानी, जंगलों में चलाया विशेष अभियान

छत्तीसगढ़ रायपुर

मलेरिया के खिलाफ जंगलों में उतरा स्वास्थ्य महकमा, संवेदनशील इलाकों की परखी तैयारियां

कोटा एवं लोरमी के वनांचल क्षेत्रों का मैदानी निरीक्षण, शत-प्रतिशत सर्विलांस, त्वरित जांच और उपचार सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

रायपुर,
 प्रदेश में वर्षा ऋतु के दौरान मलेरिया एवं अन्य वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्वास्थ्य विभाग ने संवेदनशील वनांचल क्षेत्रों में निगरानी एवं नियंत्रण गतिविधियों को और अधिक सुदृढ़ किया है। इसी क्रम में राज्य स्तरीय अधिकारियों ने बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड तथा मुंगेली जिले के लोरमी विकासखंड के दूरस्थ वन क्षेत्रों का मैदानी निरीक्षण एवं सहायक पर्यवेक्षण  किया। निरीक्षण के दौरान मलेरिया नियंत्रण गतिविधियों की जमीनी स्थिति का आकलन कर प्रत्येक संवेदनशील क्षेत्र तक समयबद्ध जांच, उपचार एवं निगरानी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।

निरीक्षण के दौरान अचानकमार, कोटा सहित दूरस्थ वन क्षेत्र बस्तियों का भ्रमण कर वहां संचालित मलेरिया नियंत्रण गतिविधियों का सूक्ष्मता से मूल्यांकन किया गया। अधिकारियों ने कहा कि आजीविका के लिए जंगलों में निवास करने वाले परिवारों तक भी स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित पहुंच सुनिश्चित करना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है, ताकि कोई भी संवेदनशील आबादी मलेरिया जांच एवं उपचार से वंचित न रहे।

मैदानी भ्रमण के दौरान जिला स्वास्थ्य अमले को सभी वन बस्तियों एवं वैकल्पिक आवासीय स्थलों में शत-प्रतिशत सक्रिय मलेरिया सर्विलांस संचालित करने, प्रत्येक परिवार की लाइन लिस्टिंग तैयार करने, रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDT) किट एवं मलेरिया रोधी दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा प्रत्येक संदिग्ध मरीज की तत्काल जांच एवं उपचार करने के निर्देश दिए गए। साथ ही नियमित फील्ड मॉनिटरिंग को और अधिक प्रभावी बनाते हुए संभावित संक्रमण वाले क्षेत्रों पर विशेष निगरानी बनाए रखने के भी निर्देश दिए गए।

निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण के दौरान संभागीय संयुक्त संचालक डॉ. गायत्री बांधी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी मुंगेली डॉ. शीला शाह, उप संचालक वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम डॉ. वी.आर. भगत तथा संबंधित जिलों के जिला मलेरिया अधिकारियों की टीम ने क्षेत्र में संचालित गतिविधियों, सर्विलांस व्यवस्था, जांच एवं उपचार की उपलब्धता तथा मैदानी अमले की कार्यप्रणाली का विस्तृत जायजा लिया। अधिकारियों ने जिला एवं विकासखंड स्तर पर गठित रैपिड रिस्पांस टीम (RRT) को 24×7 अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश दिए। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि किसी भी क्षेत्र से मलेरिया क्लस्टर अथवा संभावित प्रकोप की सूचना प्राप्त होने पर 24 घंटे के भीतर टीम मौके पर पहुंचकर आवश्यक नियंत्रण एवं रोकथाम की कार्रवाई प्रारंभ करे।

मलेरिया के प्रत्येक संभावित मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य स्तर पर लगातार मैदानी निगरानी, नियमित समीक्षा एवं त्वरित हस्तक्षेप किया जा रहा है। विभाग का उद्देश्य वर्षा ऋतु के दौरान मलेरिया के प्रसार को प्रभावी ढंग से नियंत्रित रखते हुए प्रदेश के प्रत्येक नागरिक, विशेषकर दूरस्थ वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों तक समय पर जांच, उपचार एवं आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना है। विभाग ने बुखार से पीड़ित बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि संवेदनशील समूहों में संक्रमण की समय रहते पहचान कर प्रभावी उपचार उपलब्ध कराया जा सके।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry