राजस्थान सरकार ने प्राचार्य नियुक्ति नियम बदलकर पारदर्शी चयन व्यवस्था लागू की

राज्य

उदयपुर
राजस्थान सरकार ने राजकीय एवं राजमेस मेडिकल कॉलेजों में प्राचार्य एवं नियंत्रक के चयन और नियुक्ति संबंधी नियमों में संशोधन करते हुए नई व्यवस्था लागू कर दी है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 11 नवंबर 2025 को जारी दिशा-निर्देशों में बदलाव कर नया परिपत्र जारी किया है। संशोधित नियमों के तहत अब नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने का प्रयास किया गया है। नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।

संशोधित नियमों के अनुसार, राज्य के सरकारी एवं राजमेस मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के मानकों के अनुरूप पात्र वरिष्ठ आचार्य-प्राचार्य एवं नियंत्रक पद के लिए आवेदन कर सकेंगे। यदि राज्य में पात्र उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होते हैं तो केंद्र अथवा अन्य राज्य सरकारों के मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत चिकित्सा शिक्षकों को भी आवेदन का अवसर मिलेगा। इससे योग्य अभ्यर्थियों का दायरा पहले की तुलना में बढ़ जाएगा।

उच्चस्तरीय समिति करेगी चयन
नई चयन प्रक्रिया में प्राचार्य एवं नियंत्रक का चयन साक्षात्कार के जरिए होगा। इसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में चयन समिति गठित होगी। समिति में कार्मिक विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा संबंधित चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति सदस्य होंगे। समिति अभ्यर्थियों की प्रशासनिक दक्षता और शैक्षणिक योग्यता का मूल्यांकन कर चयन करेगी।

समिति प्रत्येक मेडिकल कॉलेज के लिए तीन अभ्यर्थियों का पैनल तैयार करेगी। अनुमोदन मिलने के बाद चयनित अभ्यर्थी को संबंधित मेडिकल कॉलेज में नियुक्त किया जाएगा। राज्य सरकार आवश्यकता पड़ने पर चयनित प्राचार्य एवं नियंत्रक का स्थानांतरण किसी अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेज में भी कर सकेगी।

उम्र की बाध्यता खत्म
संशोधित नियमों में बड़ा बदलाव अधिकतम आयु सीमा को लेकर किया गया है। वर्ष 2025 के आदेश में प्राचार्य एवं नियंत्रक पद के लिए केवल 57 वर्ष तक के चिकित्सा शिक्षक ही आवेदन के पात्र थे। नए संशोधित नियमों में यह शर्त हटा दी गई है। इससे अब सेवा में कार्यरत वरिष्ठ एवं अनुभवी चिकित्सा शिक्षकों के लिए भी प्राचार्य बनने का अवसर खुल गया है।

3 वर्ष का कार्यकाल
चयनित प्राचार्य एवं नियंत्रक का प्रारंभिक कार्यकाल तीन वर्ष का होगा। इसके बाद एक बार में एक वर्ष तथा अधिकतम तीन वर्ष तक पुनर्नियुक्ति अथवा सेवा विस्तार दिया जा सकेगा। यदि किसी अधिकारी के खिलाफ गंभीर आरोप, भ्रष्टाचार या प्रशासनिक अनियमितता की शिकायत मिलती है तो राज्य सरकार जांच भी करा सकेगी।

अनुभव की शर्त तय
आवेदक के लिए अधीक्षक अथवा अतिरिक्त प्राचार्य पद पर तीन वर्ष और विभागाध्यक्ष के रूप में दो वर्ष का अनुभव अनिवार्य रखा गया है। चयनित अधिकारी को कार्यभार संभालने से पहले एक माह तक वर्तमान प्राचार्य के अधीन पीएमसी डेजिग्नेट के रूप में कार्य करना होगा। इस दौरान कॉलेज के प्रशासनिक कार्य, बैठकों और फाइलों की जानकारी दी जाएगी।

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