चंडीगढ
हाईकोर्ट की एकल बेंच द्वारा 25 मई को गेस्ट टीचर को नियमित करने व समस्त लाभ देने के आदेश के विरुद्ध सरकार की अपली का हाई कोर्ट ने निपटारा कर दिया। कोर्ट ने सरकार को कहा कि अगर गेस्ट टीचर सुप्रीम कोर्ट की मदन सिंह जजमेंट और 3 साल की पॉलिसी से कवर होते है, तो इनको दो महीने में नियमित करने पर सरकार विचार करे।
अपील में याचिकाकर्ताओं की तरफ से कहा कि वर्ष 2006 ले कर अब तक अनेक बार हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट ने गेस्ट टीचर्स के संदर्भ में व्यापक फैसले दिए हुए है। जिनके बारे में हाईकोर्ट को गेस्ट टीचर्स व सरकारी पक्ष ने मामले की सुनवाई के दौरान नहीं बताया और कोर्ट से तथ्यों को छुपाया गया, जिसके चलते कोर्ट ने गेस्ट टीचर्स को समस्त लाभ सहित रेगुलर करने का ऑर्डर कर दिया। सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि एकल बेंच में सही पक्ष को नहीं सुना गया और आदेश में संशोधन जरूरी है।
ज्ञात रहे कि इस मामले में एक पुनर्विचार याचिका भी हाई कोर्ट में विचाराधीन है। पुनर्विचार याचिका में बताया गया है कि हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के अनेक फैसलों के मद्देनजर नियमित भर्ती पूरी होने के बाद गेस्ट टीचर्स को सेवा से मुक्त करने के आदेशों की पालना करने की बजाय सरकार ने इनको 58 साल तक की सेवा सुरक्षा देने का भी 2019 में एक्ट बना दिया। इस मामले पर आगामी सुनवाई 9 सितम्बर को होगी।
गौरतलब है कि हुड्डा सरकार में वर्ष 2005-2006 में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 3 महीनों के लिए शिक्षण हेतु गेस्ट टीचर्स रखने की नीति बनाई गई थी और स्कूल मुखिया के स्तर पर ही गांव के ही युवाओं को प्राथमिकता देते हुए नियुक्ति हुई थी। इन नियुक्तियों में स्कूल मुखियाओं द्वारा अनियमितताएं किए जाने के भी काफी मामले सामने आये थे और विभागीय जांच में 719 से ज्यादा गेस्ट टीचर्स की नियुक्तियों में अनियमितता मिली थी।
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