चंडीगढ़.
पंजाब सरकार ने राजस्थान से नदी जल की आपूर्ति के एवज में 1.44 लाख करोड़ रुपये की रायल्टी और मुआवजे की मांग की है। सरकार ने राजस्थान को अंतिम मांग नोटिस जारी करते हुए 30 दिन के भीतर राशि जमा करने को कहा है। भुगतान नहीं होने पर कानूनी कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी दी गई है।
पंजाब का दावा 1961 से 2025 तक राजस्थान की ओर से इस्तेमाल किए गए नदी जल की रायल्टी से जुड़ा है। पंजाब ने राजस्थान सरकार के जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को भेजे पत्र में कहा है कि पूर्व में किए गए पत्राचार के बावजूद बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया। इससे पहले 18 मार्च और चार मई को भी राजस्थान को पत्र भेजे गए थे।
1920 के समझौते को बनाया आधार
पंजाब सरकार ने अपनी मांग का आधार चार सितंबर, 1920 को शिमला में बीकानेर, बहावलपुर और पंजाब के तत्कालीन शासकों के बीच हुए जल बंटवारे के समझौते को बनाया है। पंजाब के अनुसार, राजस्थान को उपलब्ध कराए गए पानी के लिए बीकानेर से प्रति एकड़ प्रतिवर्ष 6.50 रुपये सेस लिया जाता था। बाद में पंजाब ने मौजूदा दर 141.20 रुपये प्रति एकड़ प्रतिवर्ष के हिसाब से बकाया राशि की गणना की है। इसमें औसतन 10 मिलियन एकड़ फीट पानी की रायल्टी और आठ प्रतिशत ब्याज भी शामिल किया गया है। इंडस वाटर ट्रीटी पर हस्ताक्षर होने तक राजस्थान की ओर से रायल्टी का भुगतान किए जाने का भी पंजाब ने उल्लेख किया है।
हरियाणा से भी 312.59 करोड़ की मांग
इसी बीच पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा ने हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी को पत्र लिखकर भाखड़ा नहर प्रणाली की साझा वाहक नहरों के संचालन और रखरखाव के 312.59 करोड़ रुपये मांगे हैं। इसमें भाखड़ा मेन लाइन डिवीजन, पटियाला के 281.78 करोड़ और मानसा डिवीजन के 30.80 करोड़ रुपये शामिल हैं। पंजाब के अनुसार हरियाणा ने 2015-16 के बाद से नहर रखरखाव का भुगतान नहीं किया है। भाखड़ा नहर की कुल आवंटन क्षमता 12,455 क्यूसेक है। इसमें हरियाणा का हिस्सा 63 प्रतिशत यानी 7,841 क्यूसेक, पंजाब का 25 प्रतिशत यानी 3,108 क्यूसेक है। राजस्थान को सात, दिल्ली को चार और चंडीगढ़ को एक प्रतिशत हिस्सा निर्धारित है।
बीबीएमबी बकाये पर 20 अगस्त को सुनवाई
उधर, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड की परियोजनाओं से हिमाचल प्रदेश को मिलने वाले बकाये के मामले में केंद्र ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पंजाब सरकार केंद्र के भुगतान संबंधी प्रस्ताव पर सहमति के काफी करीब है। केंद्र ने नकद भुगतान के बजाय ऊर्जा के माध्यम से बकाये के निपटारे का प्रस्ताव दिया है। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad
