ईरान से जंग में अमेरिका को बड़ा झटका, 45 Reaper ड्रोन गंवाए; मिसाइलों और हथियारों का स्टॉक भी घटा

दुनिया

वाशिंगटन

ईरान के साथ चल रही जंग में अमेरिका को अपने MQ-9 रीपर ड्रोन का बड़ा नुकसान हुआ है. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अब तक कम से कम 45 रीपर ड्रोन खो चुके हैं. यह युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका के कुल रीपर ड्रोन का करीब 25 फीसदी है. इन ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी और हमले के लिए किया जाता है. एक रीपर ड्रोन की कीमत उसके सेंसर और हथियारों के हिसाब से 30 से 50 मिलियन डॉलर तक हो सकती है। 

इन 45 ड्रोन के नुकसान की कीमत 1.3 अरब डॉलर से ज्यादा हो सकती है. हालांकि, सभी ड्रोन दुश्मन के हमले में नहीं गिरे. एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, कुछ ड्रोन का अपने ऑपरेटर से संपर्क टूट गया था, जिसके बाद वे क्रैश हो गए. अमेरिका को जंग में ड्रोन के साथ तकनीकी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा है। 

होर्मुज के पास ज्यादा इस्तेमाल हुए रीपर
अमेरिकी सेना ने ईरान युद्ध के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास रीपर ड्रोन का काफी इस्तेमाल किया. यह समुद्री रास्ता बहुत अहम है और ईरान-अमेरिका तनाव का एक बड़ा केंद्र बना हुआ है. रीपर ड्रोन लंबे समय तक आसमान में रहकर निगरानी कर सकता है और जरूरत पड़ने पर हमला भी कर सकता है। 

इसकी रफ्तार कम होती है और यह कई बार कम ऊंचाई पर उड़ता है. इसी वजह से ईरान की सेना और यमन व इराक में उसके सहयोगी गुटों के लिए इन्हें निशाना बनाना आसान हो सकता है। 

अमेरिका के पास कितने रीपर ड्रोन थे?
युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिकी सेना के पा
स करीब 185 रीपर ड्रोन थे. इनमें 165 एयर फोर्स और 20 मरीन कॉर्प्स के पास थे. मरीन कॉर्प्स ने कहा है कि उसके किसी रीपर ड्रोन का नुकसान नहीं हुआ है। 

मई में एयर फोर्स के लेफ्टिनेंट जनरल डेविड टैबर ने अमेरिकी सीनेट को बताया था कि अमेरिका के पास करीब 135 रीपर ड्रोन बचे थे. उस समय उन्होंने ड्रोन के लगातार हो रहे नुकसान पर चिंता जताई थी। 

अमेरिका अब पुराने रीपर ड्रोन को धीरे-धीरे हटाने की तैयारी कर रहा है. उनकी जगह कम कीमत वाले हथियारबंद ड्रोन लाने की योजना है. ये ड्रोन एक साथ कई ड्रोन के समूह में काम कर सकेंगे। 

मिसाइलों का स्टॉक भी घटा

ईरान युद्ध में अमेरिका ने बड़ी संख्या में मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया है. युद्ध के पहले महीने में अमेरिकी सेना ने 850 से ज्यादा टॉमहॉक क्रूज मिसाइल और 1,000 से ज्यादा पैट्रियट और THAAD मिसाइलें इस्तेमाल कीं। 
THAAD मिसाइलों का इस्तेमाल दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए किया जाता है. अमेरिका की मौजूदा क्षमता एक साल में ज्यादा से ज्यादा 96 THAAD इंटरसेप्टर बनाने की है. लेकिन अगले साल अमेरिका को 857 और अगले पांच साल में करीब 2,600 THAAD इंटरसेप्टर की जरूरत बताई गई है। 

हथियारों का भंडार भरना बड़ी चुनौती
अमेरिकी सरकार ईरान युद्ध के खर्च और हथियारों की भरपाई के लिए कांग्रेस से 67 अरब डॉलर के अतिरिक्त बजट की मांग कर रही है. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के मुताबिक, सितंबर के अंत तक युद्ध पर करीब 37.5 अरब डॉलर खर्च हो सकते हैं। 

ईरान युद्ध के साथ यूक्रेन को दिए गए अमेरिकी हथियारों ने भी अमेरिका के सैन्य भंडार पर दबाव बढ़ाया है. अब ड्रोन और मिसाइलों को फिर से तैयार करने की जरूरत है. लेकिन नए हथियार बनाने में समय लगेगा. ऐसे में अमेरिका के सामने युद्ध का खर्च संभालने और हथियारों का भंडार फिर भरने, दोनों की चुनौती है। 

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry