लखनऊ
पिछले डेढ़ साल से भरवारा रेलवे क्रासिंग पर बनने वाले रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) का रास्ता साफ हो गया। आरओबी की जद में आने वाले 80 लोगों में 35 विस्थापित परिवारों को प्रशासन मुआवजे के साथ ही पचास वर्ग मीटर का मकान देगा।
शेष लोगों को मुआवजा दिया जाएगा। इस प्रकिया में छह माह का समय लगेगा लेकिन आरओबी वर्ष 2027 से बनना शुरू हो जाएगा। आरओबी बनने से चार लाख से अधिक आबादी को जहां राहत मिलेगी, वहीं कनेक्टिविटी के मामले में यह मार्ग भी बेहतर हो जाएगा। वाई शेप के बनने वाले आरओबी पर उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम 126.86 करोड़ रुपये खर्च करेगा।
रुक गया था आरओबी से जुड़ा काम
मामला न्यायालय में जाने के बाद भरवारा आरओबी से जुड़ा काम रुका था। अब न्यायालय के आदेश पर लोगों में उम्मीद जागी है। आरओबी बनने के दौरान जिनके मकान, दुकान व अन्य संपत्तियां आ रही हैं, उनकी नाप जोख फिर से होगी। विस्थापितों की सूची प्रशासन के पास है लेकिन फिर से यह प्रकिया नए सिरे से अपनाई जाएगी।
भरवारा क्रासिंग संख्या 186 पर बनने वाले वाई शेप के आरओबी की कुल लंबाई 947.577 मीटर होगी। आरओबी की चौड़ाई 8.50 मीटर होगी। विराज खंड की तरफ 295.827 मीटर लंबा होगा।
लोयला स्कूल की तरफ 288.799 मीटर, छोटा भरवारा की तरफ 299.551 मीटर और रेलवे भाग की लंबाई 63.40 मीटर होगी। अगर मार्च 2027 में निर्माण कार्य शुरू होता है तो मार्च 2029 तक यह बनकर तैयार हो जाएगा।
एक नजर: भरवारा आरओबी – 186
पहुंच मार्ग की लागत ₹37.46 करोड़
यूटिलिटी शिफ्टिंग की लागत ₹3.40 करोड़
भूमि अध्याप्ति ₹65.00 करोड़
रेलवे भाग की लागत ₹21.00 करोड़
कुल लागत ₹126.86 करोड़
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