QR कोड स्कैन करते ही मिलेगी वर्चुअल लैब, CBSE स्कूलों में डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा

उत्तर प्रदेश राज्य

लखनऊ
 सीबीएसई (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) स्कूलों में विद्यार्थियों को विज्ञान और गणित की प्रायोगिक पढ़ाई के लिए अब भौतिक प्रयोगशाला के साथ वर्चुअल लैब की सुविधा भी मिलेगी।

सीबीएसई ने स्कूलों को 845 से अधिक पाठ्यक्रम आधारित वर्चुअल लैब और डिजिटल संसाधनों का उपयोग कराने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, वर्चुअल लैब भौतिक प्रयोगशाला का विकल्प नहीं होगी।

इसे प्रयोगों और विषय की अवधारणाओं को बेहतर ढंग से समझाने के लिए वैकल्पिक और पूरक व्यवस्था के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। प्रदेश के करीब पांच हजार सीबीएसई स्कूलों के बच्चों को यह सुविधा रहेगी।

शिक्षा मंत्रालय और इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सीआइईटी-एनसीईआरटी के माध्यम से यह डिजिटल रिपाजिटरी तैयार की है। इसमें अधिकांश वर्चुअल लैब विज्ञान और गणित विषयों से जुड़ी हैं। इन्हें एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम के अनुसार कक्षा, विषय और अध्याय से जोड़ा गया है।

इससे विद्यार्थियों को संबंधित पाठ पढ़ते समय प्रयोग आधारित डिजिटल सामग्री भी उपलब्ध हो सकेगी। विद्यार्थी इन वर्चुअल लैब और डिजिटल संसाधनों को दीक्षा पोर्टल और मोबाइल एप पर कक्षा, विषय और अध्याय के अनुसार देख सकेंगे।

एनसीईआरटी की पुस्तकों में प्रत्येक अध्याय की शुरुआत में दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन करके भी संबंधित वर्चुअल लैब और डिजिटल संसाधनों तक पहुंच बनाई जा सकेगी। इसके अलावा दीक्षा की एआइ आधारित आस्क दीक्षा सुविधा और दीक्षा पर्सनलाइज्ड एडाप्टिव लर्निंग (पीएएल) के माध्यम से भी इन संसाधनों का उपयोग किया जा सकेगा।

सीबीएसई ने स्कूल प्रमुखों से विद्यार्थियों और शिक्षकों को इन डिजिटल संसाधनों का अधिक से अधिक उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करने को कहा है।

सीबीएसई स्कूल सहोदय की ज्वाइंट सेक्रेटरी डॉ. प्रेरणा मित्रा का कहना है कि जो विद्यार्थी नियमित रूप से भौतिक विज्ञान प्रयोगशाला का उपयोग नहीं कर पाते हैं, उनके लिए वर्चुअल लैब काफी उपयोगी होगी। हालांकि, लर्निंग बाय डूइंग भी जरूरी है।

 

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