यूपी में बढ़ेगी रामसर साइट्स की संख्या, सात नए वेटलैंड से पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

उत्तर प्रदेश राज्य

 लखनऊ
 तालाब, झील और नदियों से जुड़े वेटलैंड सिर्फ पानी का ठिकाना नहीं, बल्कि हमारे पर्यावरण की प्राकृतिक जीवनरेखा हैं। ये भूजल को रिचार्ज करने के साथ बाढ़ के प्रभाव को कम करते हैं और हजारों जलीय जीवों व पक्षियों को आश्रय देते हैं।

इसी महत्व को देखते हुए प्रदेश सरकार ने ऐसी सात और वेटलैंड को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी शुरू कर दी है। योगी सरकार ने सात वेटलैंड को रामसर साइट घोषित कराने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेज दिया है।
राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण की ओर से तैयार प्रस्तावों के आधार पर केंद्र से आगे की प्रक्रिया पूरी करने का आग्रह किया गया है। वर्तमान में प्रदेश में 13 रामसर साइट हैं। मैनपुरी के सौंज वेटलैंड का प्रस्ताव पहले से केंद्र सरकार के पास है।

सात नए स्थल जुड़ने के बाद संख्या हो जाएगी 21
सात नए स्थल जुड़ने के बाद इनकी संख्या 21 होने की उम्मीद है। रामसर साइट का दर्जा किसी वेटलैंड को अंतर्राष्ट्रीय महत्व की पहचान देता है। इससे संबंधित क्षेत्रों के वैज्ञानिक संरक्षण, जल प्रबंधन, जैव विविधता की निगरानी और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के अवसर बढ़ते हैं।

साथ ही स्थानीय स्तर पर लोगों को इन जलक्षेत्रों के महत्व से जोड़कर इनके संरक्षण की जिम्मेदारी को सामुदायिक प्रयास में बदला जा सकता है।

सात नए प्रस्तावों को स्वीकृति मिलने पर राज्य की अंतर्राष्ट्रीय महत्व वाले वेटलैंड का दायरा और बढ़ेगा, जिससे जल संरक्षण और जैव विविधता के संरक्षण की मुहिम को नई ताकत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

इन वेटलैंड का भेजा गया प्रस्ताव
1- सिंगरहना ताल, महराजगंज
 नेपाल सीमा के करीब स्थित यह वेटलैंड स्थानीय जल पारिस्थितिकी और पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां पानी पर निर्भर जैव विविधता को संरक्षण मिलने की संभावना है।

2- लाख बहोसी झील, कन्नौज
 कन्नौज की प्रमुख वेटलैंड में शामिल लाख बहोसी क्षेत्र पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। सर्दियों में यहां प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी इस क्षेत्र की जैव विविधता को खास बनाती है।

3- झाड़ी ताल, लखीमपुर खीरी
 तराई क्षेत्र में स्थित यह वेटलैंड जल संरक्षण और जलीय पारिस्थितिकी के लिहाज से महत्वपूर्ण है। आसपास के प्राकृतिक आवासों के संरक्षण में भी इसकी भूमिका है।

4- लोअर चंबल रिवर, इटावा
 बिंदवान कलां से भरेह संगम स्ट्रेच तक चंबल नदी का यह हिस्सा नदी आधारित पारिस्थितिकी का महत्वपूर्ण क्षेत्र है। नदी और उसके आसपास का प्राकृतिक तंत्र अनेक जलीय जीवों और पक्षियों को आश्रय देता है।

5- गिरिजापुरी बैराज, बहराइच
घाघरा नदी तंत्र से जुड़ा गिरिजापुरी क्षेत्र जल और जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। बैराज के आसपास का जलक्षेत्र स्थानीय और प्रवासी पक्षियों के लिए अनुकूल आवास उपलब्ध कराता है।

6- सीताद्वार झील, श्रावस्ती
 यह प्राकृतिक जलक्षेत्र स्थानीय जैव विविधता के साथ-साथ धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी रखता है। इसके संरक्षण से जल स्रोत और उससे जुड़े पारिस्थितिक तंत्र को मजबूती मिल सकती है।

7- कुदैय्या (या कुकेटैया) वेटलैंड, मैनपुरी
 करहल-किशनी मार्ग के पास स्थित यह वेटलैंड समृद्ध जैव विविधता और राज्य पक्षी सारस क्रेन सहित विभिन्न जलपक्षियों का महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास माना जाता है।

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