बच्चों के स्वस्थ भविष्य की पहल: शिशु संरक्षण माह का आगाज, स्वास्थ्य और पोषण बनेगा केंद्रबिंदु

मध्य प्रदेश राज्य

रायपुर

’शिशु संरक्षण माह का शुभारंभ, बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण पर रहेगा विशेष फोकस’

बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और उत्तरजीविता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में शिशु संरक्षण माह का शुभारंभ किया गया। जिला चिकित्सालय जशपुर में आयोजित कार्यक्रम में जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. गौरव सिंह एवं डॉ. गीतांजलि तिवारी ने बच्चों को विटामिन-ए की खुराक पिलाकर अभियान की शुरुआत की। अभियान 18 अगस्त से 24 सितंबर 2026 तक संचालित होगा।

जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. गौरव सिंह ने बताया कि शिशु संरक्षण माह के दौरान प्रत्येक मंगलवार एवं शुक्रवार को वी.एच.एन.डी. सत्र आयोजित किए जाएंगे। अभियान में 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को विटामिन-ए तथा 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को आई.एफ.ए. सिरप दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि शिशु संरक्षण माह केवल विटामिन-ए अनुपूरण का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि बच्चों की उत्तरजीविता बढ़ाने तथा उनके समग्र स्वास्थ्य एवं पोषण में सुधार के लिए विभिन्न स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं को एकीकृत रूप से उपलब्ध कराने का अभियान है। 

’टीकाकरण, वजन जांच और पोषण परामर्श की मिलेगी सुविधा’

अभियान के दौरान निर्धारित आयु वर्ग के बच्चों को विटामिन-ए की खुराक के साथ आई.एफ.ए. सिरप की एक बोतल प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही ड्यू बच्चों का टीकाकरण, वजन जांच, पोषण संबंधी परामर्श तथा बच्चों की आयु के अनुरूप संतुलित एवं पौष्टिक आहार की जानकारी दी जाएगी।

आंगनबाड़ी केंद्रों में आयोजित सत्रों के माध्यम से पात्र बच्चों को पूरक पोषण आहार की सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। वहीं अति गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें उपचार एवं पोषण पुनर्वास के लिए पोषण पुनर्वास केंद्रों में भर्ती कराया जाएगा।

’जशपुर जिले में 2766 सत्र होंगे आयोजित’

शिशु संरक्षण माह के अंतर्गत अगस्त में 18, 21, 25 एवं 29 अगस्त तथा सितंबर में 1, 5, 8, 11, 16, 18, 21 एवं 24 सितंबर को निर्धारित सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में बच्चों को विटामिन-ए एवं आयरन सिरप देने के साथ उनका वजन भी लिया जाएगा।

बच्चों की आयु एवं लंबाई के आधार पर कम वजन वाले बच्चों की पहचान कर आवश्यकतानुसार उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्रों में 14 दिनों के लिए भर्ती कर उपचार एवं पोषण पुनर्वास की सुविधा दी जाएगी। केंद्र में बच्चे के भर्ती होने पर उसकी मां को कार्य क्षतिपूर्ति राशि भी प्रदान की जाएगी।

जिले में कुल 2766 सत्र आयोजित होंगे। इनमें पत्थलगांव में 485, फरसाबहार में 360, कांसाबेल में 288, बगीचा में 630, कुनकुरी में 320, दुलदुला में 129, लोदाम में 324 तथा मनोरा में 230 सत्र शामिल हैं।

’78,370 बच्चों को दी जाएगी विटामिन-ए की खुराक’

अभियान के तहत जिले में कुल 78,370 बच्चों को विटामिन-ए की खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विकासखंडवार लक्ष्य में पत्थलगांव के 19,571, फरसाबहार के 8,456, कांसाबेल के 5,982, बगीचा के 15,848, कुनकुरी के 9,294, दुलदुला के 3,420, जशपुर के 9,580 तथा मनोरा के 6,219 बच्चे शामिल हैं।

डॉ. गीतांजलि तिवारी ने बताया कि विटामिन-ए अनुपूरण एवं एनीमिया नियंत्रण से बाल मृत्यु में कमी लाने में महत्वपूर्ण मदद मिलती है। इसी तरह कुपोषण की रोकथाम, शीघ्र एवं पूर्ण स्तनपान तथा समय पर ऊपरी आहार शुरू करना बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और उत्तरजीविता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे निर्धारित तिथियों पर अपने पात्र बच्चों को निकटतम वी.एच.एन.डी. सत्र में लेकर जाएं और विटामिन-ए, आयरन सिरप, टीकाकरण, वजन जांच तथा पोषण संबंधी सेवाओं का लाभ अवश्य उठाएं।

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