मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़! नकली दवा कारोबार में 30-40% कमीशन, करोड़ों की फर्जी बिलिंग पकड़ी

उत्तर प्रदेश राज्य

लखनऊ
यूपी की राजधानी लखनऊ में मरीजों की जिंदगी से जुड़े दवा कारोबार में मोटे कमीशन का खेल चल रहा है। कमशीनखोरी नकली दवाओं के नेटवर्क को बढ़ाने का जरिया बनता जा रहा है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) और एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि नेटवर्क से नई मेडिकल दुकान जोड़ने वाले कर्मचारियों को 30 से 40 फीसदी तक कमीशन दिया जाता था। यही लालच उन्हें लगातार नई दुकानों तक पहुंच बनाने के लिए प्रेरित करता था। आरोप हैं कि दुकानदार नकली दवाओं के बारे में जानते हैं। फिर भी कमाई के लालच में मरीजों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं।

लखनऊ में करीब 4000 फुटकर और 3000 थोक दवा दुकाने हैं। इतने बड़े बाजार में किसी एक दुकान के जरिए संदिग्ध दवाओं की सप्लाई शुरू होने पर उसके आगे कई दुकानों तक पहुंचने की आशंका ने चिंता बढ़ा दी है। हाल की जांच में राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से उत्तर प्रदेश में संदिग्ध नकली दवाओं की सप्लाई के मामले सामने आए हैं। लखनऊ समेत कई शहरों में गोदाम भी पकड़े गए हैं। एफएसडीए के सहायक आयुक्त ब्रजेश कुमार का कहना है कि छापेमारी के दौरान पकड़े गए लोगों ने कमीशन की बात कुबूली है। नकली दवा कारोबारी किसी भी दशा में बच नहीं पाएंगे। छापेमारी का सिलसिला जारी रहेगा।

कमाई के लालच में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़
नकली दवाओं के कारोबार में शामिल कुछ दुकानदारों को दवाओं की असलियत की जानकारी होने के बावजूद मोटे मुनाफे का लालच नहीं छूट रहा। कम कीमत में दवा खरीदकर अधिक कमाई के लिए मरीजों तक पहुंचाई जा रही हैं। कमीशन के इस खेल में मरीजों की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है। नकली दवाओं का असर इलाज पर भी पड़ सकता है।

दवा पहुंचाने पर भी कमीशन
जांच में सामने आए नेटवर्क के मुताबिक गोदाम से मेडिकल स्टोर तक दवा पहुंचाने वाले कर्मचारियों को वेतन के अलावा 25 फीसदी तक कमीशन दिया जाता था। वहीं किसी नई मेडिकल दुकान पर पहली बार सप्लाई शुरू कराने वाले कर्मचारी को 30 से 40 फीसदी तक कमीशन मिलने की बात सामने आई। बड़ी खेप को गोदाम तक पहुंचाने वाले लोगों को भी कमीशन दिए जाने की जानकारी जांच में सामने आई है।

बिना दवा भेजे कागजों पर कारोबार
नकली दवा नेटवर्क का एक और चौंकाने वाला तरीका फर्जी बिलिंग बताया गया है। एफएसडीए की कार्रवाई में ऐसे मामले सामने आए। जहां बिना दवा की वास्तविक आवाजाही के फर्जी बिल बनाए गए। अलग-अलग फर्मों के बीच क्रॉस-बिलिंग की गई और कागजों पर लेनदेन दिखाया गया। इससे नकली दवाओं को वैध दवा सप्लाई चेन में शामिल करने की कोशिश की गई।

हाल ही में हुईं कार्रवाई
-लखनऊ में करीब 8.87 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग पकड़ी गई

-करीब 39 लाख टैबलेट का हिसाब नहीं मिलने का मामला भी सामने आ चुका है। जिसमें चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है

-31 अगस्त 2025 को पारा में नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बनाने वाली फैक्टरी का भंडाफोड़ हुआ। 2 करोड़ के इंजेक्शन बरामद

-9 जुलाई 2026 को 25 फर्मों से संदिग्ध व नकली दवाएं बरामद। 26 लाख की दवा आंकी गई

-जुलाई 2026 में नकली व संदिग्ध दवाओं की अलग-अलग कार्रवाई हुई। 15.5 लाख की दवाएं बरामद

-18 जुलाई 2026 को बीकेटी में 2157 संदिग्ध दवा की बोतलें बरामद। 4.37 लाख की दवाएं सीज।

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