मुंबई
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की कार्रवाई का समर्थन किया है। उन्होंने FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे की कार्रवाई पर पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह अभियान जारी रहेगा।
मुंढे के अभियान पर अपनी पहली टिप्पणी में फडणवीस ने कहा, "FDA की कार्रवाई बहुत अच्छी तरह से चल रही है। अगर खाने-पीने की चीजों में मिलावट होती है या खाद्य सुरक्षा के नियमों का उल्लंघन होता है, तो इससे लोगों की जान और सेहत को गंभीर खतरा होता है। इसलिए, सख्त कार्रवाई जरूरी है।" मुंढे को पूरी छूट देते हुए फडणवीस ने कहा, "यह कार्रवाई जारी रहेगी।"
तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में FDA का एक्शन तेज
मई में FDA कमिश्नर का पद संभालने के बाद तुकाराम मुंढे की टीमों ने खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कई जगह छापेमारी की है। नोटिस जारी किए गए हैं और कई प्रतिष्ठानों के फूड लाइसेंस भी निलंबित किए गए हैं।
कार्रवाई की जद में आए प्रतिष्ठानों में शामिल हैं:
बड़े और स्थापित रेस्टोरेंट
एलीट क्लब
ग्लोबल फास्ट-फूड चेन
लोकप्रिय कैफे
आइसक्रीम पार्लर
डिलीवरी प्लेटफॉर्म के वेयरहाउस
खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की जरूरत को लेकर सहमति है, लेकिन तुकाराम मुंढे पर कार्रवाई के तरीके को लेकर सवाल भी उठे हैं। उन पर जरूरत से ज्यादा सख्ती बरतने के आरोप लगे हैं।
कुछ मामलों में प्रतिष्ठानों को सुधार का मौका दिए जाने से पहले ही बड़ी मात्रा में स्टॉक जब्त करने या वेयरहाउस और खाने-पीने की जगहों को बंद करने जैसे कदम उठाए गए। हाल ही में एफडीए की कार्रवाई के खिलाफ एक याचिका पर सुनवाई करते हुए, बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंढे को "मच्छर को मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल करने" के खिलाफ चेतावनी दी।
Vimal Elaichi विज्ञापन पर शाहरुख, अजय और टाइगर को नोटिस
खाद्य सुरक्षा नियमों को लेकर कार्रवाई के बीच तुकाराम मुंढे ने कुछ दिन पहले Vimal Elaichi के विज्ञापन में नजर आने वाले अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को भी कारण बताओ नोटिस जारी किए।
मुंढे का दावा था कि यह महाराष्ट्र में प्रतिबंधित पान मसाला के सरोगेट प्रचार के दायरे में आता है। पान मसाला के साथ गुटखा और तंबाकू भी प्रतिबंधित उत्पादों में शामिल हैं। तीनों अभिनेताओं से 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। उनसे पूछा गया है कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए।
मुंढे ने माना कि ऐसे मामलों में कार्रवाई पहले भी शुरू की जा सकती थी। उन्होंने बताया कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006 में बनाया गया था, जबकि संबंधित विज्ञापन नियम 2018 में जारी किए गए और जुलाई 2019 से उनका क्रियान्वयन शुरू हुआ।
मुंढे के मुताबिक, अगर संबंधित विज्ञापन उसके बाद भी प्रसारित हो रहे थे तो यह कहा जा सकता है कि कार्रवाई में देरी हुई। हालांकि, अब FDA ने उचित कार्रवाई शुरू कर दी है।
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