लखनऊ
गूगल स्ट्रीट व्यू सॉफ्टवेयर के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट ने अलीगंज क्षेत्र में जिन 51 अवैध भवनों को चिन्हित किया था, उनका नियमानुसार कंपाउंडिंग (शमन) कराने का रास्ता खुल गया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अलीगंज सहित शहर भर में बने अवैध भवनों का शमन कराने के लिए आवेदन लेना भी शुरू कर दिया है।
अलीगंज के अवैध भवान में 22 जून को हुए भीषण अग्निकांड के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
जिन भवनों को शीर्ष कोर्ट ने सॉफ्टवेयर के माध्यम से खोजा था उनकी जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त न्याय मित्र का 24 अगस्त को आने का कार्यक्रम था, अब इसमें बदलाव कर दिया गया है।
अवैध निर्माणों की जांच के लिए न्याय मित्र अब पांच सितंबर को लखनऊ पहुंचकर क्षेत्र का निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण से पहले न्याय मित्र ने एलडीए अधिकारियों को सुझाव दिए हैं कि जिन भवनों को नियमों के तहत वैध किया जा सकता है, उनकी कंपाउंडिंग कराकर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।
अब नियमानुसार कंपाउंडिंग (शमन) कराने का खुला रास्ता, आवेदन शुरू
असल में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया था कि केवल लखनऊ ही नहीं, बल्कि देश के कई शहरों में बड़ी संख्या में अवैध निर्माण तने हैं। भोपाल में ही 26 हजार अवैध निर्माणों की सूची सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई थी। ऐसे में सभी भवनों को ध्वस्त करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं माना गया। इसी वजह से नियमों के अनुरूप वैध किए जा सकने वाले निर्माणों के लिए कंपाउंडिंग का विकल्प दिया गया है।
निरीक्षण से पहले न्याय मित्र का एलडीए अधिकारियों को सुझाव
इस निर्णय से अलीगंज के उन भवन स्वामियों को बड़ी राहत मिली है, जो लंबे समय से ध्वस्तीकरण की आशंका से परेशान थे। न्याय मित्र के निरीक्षण के बाद अवैध निर्माणों के निस्तारण को लेकर आगे की रूपरेखा और स्पष्ट होगी।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया, अलीगंज सहित शहर के अन्य क्षेत्रों में भी जो भवन स्वामी अपने निर्माण को वैध कराना चाहते हैं, वे आवेदन कर सकते हैं। परीक्षण के बाद शमन मानचित्र स्वीकृत किया जाएगा और निर्धारित शुल्क जमा कराने के बाद कार्यवाही पूरी की जाएगी।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad
