रांची की ट्रेनों में अब हाइजीनिक लिनेन, 12 टन रोजाना धुलाई की होगी क्षमता

राज्य

रांची
 ट्रेन यात्रा के दौरान यात्रियों को स्वच्छ, हाइजीनिक और उच्च गुणवत्तापूर्ण लिनेन (बेडरोल) उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रांची रेल मंडल ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

रेलवे प्रशासन हटिया में छह टन प्रतिदिन क्षमता वाली अत्याधुनिक 'मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री' स्थापित करने जा रहा है। इस नई लॉन्ड्री के चालू होने के बाद रांची रेल मंडल की कुल लिनेन धुलाई क्षमता बढ़कर 12 टन प्रतिदिन हो जाएगी, जो वर्तमान क्षमता से सीधे दोगुनी होगी।

वर्तमान में रांची और हटिया स्थित लॉन्ड्री में प्रतिदिन तीन-तीन टन (कुल छह टन) लिनेन की धुलाई होती है। नए प्रोजेक्ट के पूरा होने से ट्रेन यात्रियों को दाग-धब्बों से मुक्त और पूरी तरह सैनिटाइज्ड बेडशीट, तकिया कवर, कंबल कवर और तौलिये मिलेंगे।

22 प्रमुख ट्रेनों में रोजाना 12,750 बेडरोल की आपूर्ति
रांची रेल मंडल से रोजाना खुलने वाली 22 वातानुकूलित (AC) ट्रेनों में यात्रियों को लगभग 12,750 लिनेन पैकेट (बेडरोल) उपलब्ध कराए जाते हैं।

यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या और भविष्य में ट्रेनों में एसी कोचों की संख्या में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए लिनेन की मांग तेजी से बढ़ रही है।

रांची से खुलने वाली प्रमुख ट्रेनें: रांची-गोड्डा एक्सप्रेस, रांची राजधानी एक्सप्रेस (12877/12878 और 20239/20240), रांची-एलटीटी एक्सप्रेस, वाराणसी, आरा, दुमका, नई दिल्ली संपर्क क्रांति, हावड़ा इंटरसिटी और गोरखपुर साप्ताहिक एक्सप्रेस।
        हटिया से खुलने वाली प्रमुख ट्रेनें: हटिया-स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस, पुणे एक्सप्रेस, झारखंड स्वर्ण जयंती (वाया गोमो), एसएमवीटी बेंगलुरु, मुंबई एलटीटी, धरती आबा, पाटलिपुत्र, क्रियायोग एक्सप्रेस और हटिया-दुर्ग स्पेशल एक्सप्रेस।

दो शिफ्टों में आधुनिक मशीनों से होगा काम
हटिया स्थित प्रस्तावित नई मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री को रोजाना आठ-आठ घंटे की दो शिफ्टों में संचालित किया जाएगा। इसमें बेडशीट, तकिये के कवर, टॉवल आदि की धुलाई, उन्हें सुखाने, स्टीम आयरन (इस्त्री) और पैकेजिंग का पूरा काम पूरी तरह ऑटोमैटिक व आधुनिक मशीनों के माध्यम से होगा।

इससे न केवल समय की भारी बचत होगी, बल्कि लिनेन की गुणवत्ता और सफाई का स्तर भी बेहतर होगा। वर्तमान में रांची मंडल स्तर पर प्रतिदिन करीब 8,500 लिनेन पैकेट ही इन-हाउस तैयार हो पाते हैं।

जबकि शेष आवश्यकता को पूरा करने के लिए आउटसोर्स एजेंसियों का सहारा लेना पड़ता है। हटिया में 6 टन क्षमता की नई लॉन्ड्री शुरू हो जाने के बाद बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और रेल मंडल अपने स्तर पर ही शत-प्रतिशत मांग को पूरा करने में सक्षम हो जाएगा।

 

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