नई दिल्ली
भारत की बैडमिंटन खिलाड़ी त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने दुनिया में 39वें नंबर पर रहते हुए BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 में देश के लिए एक पदक पक्का कर लिया है। उन्होंने नई दिल्ली के इंदिरा गांधी एरिना में शुक्रवार को खेले गए महिला युगल के क्वार्टर फाइनल मैच में चीन की चौथी वरीयता प्राप्त जोड़ी जिया यिफान और झांग शू जियान को हरा दिया। इस शानदार जीत के साथ ही उन्होंने भारत के लिए कम से कम कांस्य पदक सुनिश्चित कर इतिहास रच दिया है।
पहला सेट हारने के बाद त्रिसा और गायत्री की शानदार वापसी
इस मुकाबले में भारतीय जोड़ी की शुरुआत अच्छी नहीं रही और वे पहला गेम 16-21 से हार गए। लेकिन इसके बाद उन्होंने शानदार वापसी करते हुए दूसरा गेम 21-15 से अपने नाम किया। इसी लय को बनाए रखते हुए उन्होंने तीसरे और आखिरी गेम में 21-13 से एकतरफा जीत हासिल की। इस जीत के साथ ही भारत ने वर्ल्ड चैंपियनशिप के वुमेंस डबल्स में कम से कम एक पदक पक्का कर लिया है। साल 2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा द्वारा कांस्य पदक जीतने के बाद इस कैटेगरी में भारत का यह पहला पदक है।
पीवी सिंधु को राउंड ऑफ 16 में मिली हार
यह जीत भारत के लिए बहुत बड़ी बात है क्योंकि इस टूर्नामेंट में अब तक यही एक पदक है जो पक्का हो पाया है। इससे पहले कई बड़े खिलाड़ी, जैसे पीवी सिंधु, लक्ष्य सेन, उन्नति हुड्डा और आयुष शेट्टी जिनसे मेडल की उम्मीद थी वे हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो चुके थे। पीवी सिंधु को प्री-क्वार्टर फाइनल (राउंड ऑफ 16) मुकाबले में चीन की तीसरी वरीयता प्राप्त वांग झी ई से हार का सामना करना पड़ा। सिंधु पिछले साल भी BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गई थी।
सात्विक-चिराग से भी मेडल की उम्मीद
सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की मेंस डबल्स जोड़ी भी भारत के लिए एक और मेडल जीतने की रेस में बनी हुई है। पांचवीं वरीयता प्राप्त यह भारतीय जोड़ी शुक्रवार को क्वार्टर फाइनल मुकाबले में चीन की तीसरी वरीयता प्राप्त जोड़ी लियांग वेई केंग और वांग चांग से भिड़ेगी। अगर सात्विक और चिराग यह मैच जीत जाते हैं, तो विश्व चैंपियनशिप में भारत का दूसरा पदक भी पक्का हो जाएगा।
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