नई दिल्ली
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को गुजरात, राजस्थान, पंजाब, बंगाल, असम व त्रिपुरा (आदिवासी इलाकों को छोड़कर) और केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख में जिलाधिकारियों (डीएम) को भारत के बाहर जन्मे उन पात्र एवं उपयुक्त आवेदकों को नागरिकता देने का अधिकार दिया, जो आम तौर पर इन क्षेत्रों में रह रहे हैं।
सरकार ने बुधवार को नागरिकता (तीसरा संशोधन) नियम, 2026 की अधिसूचना जारी की, जिसमें उक्त इन राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में जिलाधिकारियों को पंजीकरण या नेचुरलाइजेशन के जरिये नागरिकता चाहने वाले आवेदनों पर कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है।
अधिसूचित नियमों में कहा गया है, "जिलाधिकारी, आवेदक की उपयुक्तता से संतुष्ट होने यानी यह तय करने पर कि वह पंजीकरण या नेचुरलाइजेशन के लिए एक पात्र व उपयुक्त व्यक्ति है, उसे भारत की नागरिकता प्रदान करेगा।"
इन राज्यों में जिलाधिकारी उन अधिकार प्राप्त समितियों और जिला स्तरीय समितियों की जगह लेंगे, जिनके पास पहले ये अधिकार थे।
सरकार ने निर्देश दिया है कि निर्दिष्ट क्षेत्रों में अधिकार प्राप्त समितियों या जिला स्तरीय समितियों के पास वर्तमान में लंबित सभी आवेदनों को तुरंत संबंधित जिलाधिकारियों को स्थानांतरित किया जाए। नए नियमों में आवेदकों के लिए खुद पेश होने की सख्त शर्तें रखी गई हैं।
नियमों में कहा गया है, "अगर कोई आवेदक उचित मौके दिए जाने के बावजूद आवेदन पर हस्ताक्षर करने और निष्ठा की शपथ लेने के लिए खुद पेश नहीं होता है, तो कलेक्टर आवेदन को खारिज कर देगा।"
सरकार ने पिछले आदेशों को भी रद कर दिया है, सिवाय उन कामों के जो रद्दीकरण आदेश से पहले किए गए थे या नहीं किए गए थे।
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