झारखंड पुलिस भर्ती में 2,380 पद रहे थे खाली, सुप्रीम कोर्ट ने पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति के दिए निर्देश

राज्य

रांची
 सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सिपाही भर्ती-2015 से जुड़े मामले में चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी नियुक्ति से वंचित रह गए पात्र अभ्यर्थियों को बड़ी राहत प्रदान की है।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस आगस्टीन जार्ज मसीह की खंडपीठ ने राज्य सरकार को पात्र अभ्यर्थियों की चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने और नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया है।

झारखंड पुलिस भर्ती से नियुक्ति से वंचित अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जितेंद्र कुमार शर्मा सहित छह अलग-अलग एसएलपी दाखिल की थी।

यह मामला झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) के विज्ञापन के तहत हुई झारखंड पुलिस सिपाही भर्ती से जुड़ा है। कुल 7,272 पदों के लिए प्रक्रिया शुरू की गई थी। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी 2,380 पद रिक्त रह गए थे।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि कई अभ्यर्थियों ने लिखित परीक्षा, शारीरिक परीक्षा, चिकित्सा जांच और दस्तावेज सत्यापन तक की प्रक्रिया पूरी कर ली थी, लेकिन दूसरी मेरिट सूची जारी नहीं होने के कारण उन्हें नियुक्ति नहीं मिल सकी।

सुप्रीम कोर्ट के तीन जून 2026 के आदेश के अनुपालन में 437 अभ्यर्थियों ने 20 अगस्त 2026 को शारीरिक दक्षता परीक्षा में भाग लिया। लगभग 125 अन्य अभ्यर्थियों को 21 अगस्त को इस परीक्षा में शामिल किया जाना था।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने माना कि 31 जुलाई 2026 के पत्र में निर्धारित मानदंड तीन जून के आदेश के अनुरूप नहीं थे। कोर्ट के निर्देश के अनुसार संबंधित अभ्यर्थियों को पूर्ण रूप से उत्तीर्ण माना जाएगा।

300 होमगार्ड अभ्यर्थियों का मामला भी उठा
सुनवाई के दौरान लगभग 300 होमगार्ड अभ्यर्थियों का मुद्दा भी सामने आया। कोर्ट ने कहा कि रिक्तियां उपलब्ध हैं और इन अभ्यर्थियों ने संतोषजनक सेवा की है, इसलिए उन्हें भी समायोजित किए जाने पर विचार किया जा सकता है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी प्रारंभिक चयन प्रक्रिया पर दोबारा सवाल उठाकर उन्हें फिर से लिखित परीक्षा में बुलाने का कोई औचित्य नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब राज्य सरकार को पात्र अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन पूरा कर चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करनी होगी और नियुक्ति-पत्र जारी करना होगा।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश इन याचिकाकर्ताओं तक ही सीमित रहेगा। इन निर्देशों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित सभी एसएलपी का निस्तारण कर दिया।

 

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