भोपाल
देश के कृषि मंत्री शिवराजसिंह चौहान को एमपी में लाड़ली बहना योजना के लिए जाना जाता है। करीब ढाई साल पहले उन्होंने ही तत्कालीन सीएम के रूप में महिलाओं के बैंक खातों में हर माह पैसे डालने की यह स्कीम चालू की थी। लाड़ली बहनों की आर्थिक दशा सुधारने के लिए शिवराजसिंह चौहान अभी भी जुटे हैं। उन्होंने महिलाओं को स्वसहायता समूह से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने का प्लान बनाया है। राखी के मौके पर शिवराजसिंह चौहान ने ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का आग्रह किया। उन्होंने लखपति दीदी को अब ‘मिलेनियम दीदी’ बनाने का संकल्प भी जताया है।
नई दिल्ली के कृषि भवन में शिवराजसिंह चौहान ने रक्षाबंधन के अवसर पर स्वयं सहायता समूहों की बहनों से संवाद किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि हमारी बहनें आत्मनिर्भर बनें, आर्थिक रूप से सशक्त हों और अपनी मेहनत से समृद्धि की नई ऊंचाइयों को छुएं— इसी संकल्प के साथ हम निरंतर प्रयासरत हैं।
केंद्रीय मंत्री शिवराजसिंह चौहान ने भावुक होते हुए कहा कि रक्षाबंधन पर बहनों ने मेरी कलाई पर राखी बांधी है और इतनी सारी बहनों से वर्चुअली जुड़ा हूं। मैं सभी बहनों को प्रणाम करता हूं और रक्षाबंधन की बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। कृषि मंत्री शिवराजसिंह चौहान ने सभी बहनों के सदैव सुखी रहने, कीर्ति और प्रतिष्ठा निरंतर आगे बढ़ने व उनके कल्याण की मंगलकामना भी व्यक्त की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं।
स्व सहायता समूह से जुड़कर आय बढ़ाने का प्लान
महिलाओं के लिए लाड़ली बहना योजना लानेवाले शिवराजसिंह चौहान ने अब स्व सहायता समूह से जुड़कर उनकी आय बढ़ाने का प्लान बनाया है। इसके लिए 3 अलग अलग चरणों के लिए उन्होंने महिलाओं को संकल्प लेने का कहा।
इस संबंध में अपने एक्स हेंडल पर केंद्रीय मंत्री शिवराजसिंह चौहान ने लिखा-
मेरी बहनों, आज राखी की पूर्व संध्या पर हम सब तीन संकल्प लें…
पहला संकल्प: जो बहनें स्वयं सहायता समूह से नहीं जुड़ी हैं, उन्हें समूह से जोड़ेंगे।
दूसरा संकल्प: जो बहनें स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं और जिनकी आमदनी कम है, उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाएँगे।
तीसरा संकल्प: जो बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं, उन्हें अब ‘मिलेनियम दीदी’ बनना है।
क्या है लखपति दीदी योजना
लखपति दीदी योजना भारत सरकार द्वारा 2023 में शुरु की गई। इसके अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं की वार्षिक घरेलू आय को कम से कम ₹1 लाख तक पहुंचाकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य है। देश भर में 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाना का लक्ष्य तय किया गया। इसके लिए महिलाओं को सिलाई, कृषि, एलईडी निर्माण और अन्य छोटे व्यवसायों का कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जाता है। बैंकों के माध्यम जरूरत के अनुसार से कर्ज भी उपलब्ध कराया जाता है।
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