बिलासपुर.
प्रणवम फेस्टिवल के 5वें संस्करण का शनिवार को आगाज हुआ. कला, संगीत और संस्कृति के क्षेत्र में अपनी अनूठी पहचान बना चुके प्रणवम फेस्टिवल के 5वें संस्करण की शुरुआत आज से हो रही है. 29 अगस्त से 3 सितंबर तक चलने वाले इस आयोजन में इस बार 1300 कलाकार सुर और ताल का जादू बिखेरंगे.
इस साल का उत्सव पहले से कहीं अधिक भव्य और विविध होने जा रहा है. इस बहुप्रतीक्षित सांस्कृतिक महाकुंभ में 8 राज्य से आए कुल 1300 प्रतिभागी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे, जो इस महोत्सव को एक नया आयाम देंगे. महोत्सव के आयोजक श्वेता नायर के अनुसार, इस पांचवें संस्करण को बेहद व्यापक रूप दिया गया है. इसमें संगीत और नृत्य की 20 अलग-अलग श्रेणियों को शामिल किया गया है. इन श्रेणियों में शास्त्रीय गायन, उप-शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत, पारंपरिक वाद्य यंत्रों का वादन, और शास्त्रीय नृत्य (जैसे कथक, भरतनाट्यम, ओडिसी) से लेकर समकालीन और लोक नृत्यों तक की अद्भुत झलक देखने को मिलेगी. यह फेस्टिवल नए और उभरते कलाकारों के लिए एक बेहतरीन मंच साबित हो रहा है, जहां वे स्थापित उस्तादों और कला पारखियों के सामने अपनी प्रतिभा को साबित कर सकेंगे.
20 विभिन्न विधाओं में होने वाली इन प्रतियोगिताओं और प्रस्तुतियों को लेकर दर्शकों और कला प्रेमियों में उत्साह रहा. विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर के आयोजन हमारी पारंपरिक विरासत को जीवित रखने और युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. दर्शकों को विभिन्न प्रस्तुतियों का एक जीवंत मिश्रण देखने को मिलेगा, जिसमें 80 सोलो (एकल), 20 डुएट (युगल) और 20 ग्रुप (सामूहिक) प्रस्तुतियां शामिल हैं. जहां एकल प्रस्तुतियां व्यक्तिगत महारत और गहरी भावनात्मक अभिव्यक्ति को उजागर करेंगी, वहीं युगल प्रस्तुतियां कलात्मक तालमेल का बेजोड़ नमूना पेश करेंगी. दिन के समापन पर, बड़े पैमाने पर होने वाली सामूहिक प्रस्तुतियाँ उत्सव के मंच पर एक नई ऊर्जा, तालबद्ध कोरियोग्राफी और शक्तिशाली सामूहिक गान का जादू बिखेरेंगी.
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