भोपाल
मध्य प्रदेश में ग्रामीण नलजल योजना संचालन-संधारण एवं प्रबंधन नियम 2026 को प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया है। इस नई नीति के तहत गांवों में पीने के पानी की सप्लाई, नए नल कनेक्शन देने, जल कर की वसूली और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का पूरा अधिकार अब सीधे ग्राम पंचायतों को सौंप दिया गया है।
नियम 27 के अंतर्गत जलापूर्ति की व्यवस्था देखने वाले सरपंच, सचिव और पानी समिति के सदस्यों को कानूनी तौर पर लोक सेवक माना जाएगा। अगर कोई व्यक्ति पंचायत प्रतिनिधियों को उनके काम (जैसे- अवैध कनेक्शन काटने या जुर्माना वसूलने) में रोकता है या अभद्रता करता है तो उसपर सरकारी काम में बाधा डालने का मामला दर्ज होगा और जेल जाना पड़ सकता है। वहीं दूसरी ओर, अगर सरपंच या सचिव द्वारा किसी तरह की आर्थिक गड़बड़ी, रिश्वतखोरी या रंजिश में कनेक्शन काटने का मामला सामने आता है तो उन पर भ्रष्टाचार अधिनियम कानून के तहत कार्रवाई होगी और उन्हें पद से हटाकर जेल भेजा जाएगा।
बिल न चुकाने व पानी के दुरुपयोग पर शिकंजा
अगर कोई उपभोक्ता समय पर पानी का बिल जमा नहीं करता तो पंचायत द्वारा 5 से 10 फीसदी तक का विलंब शुल्क (पेनाल्टी) लगाया जाएगा। लगातार 3 महीने तक बिल न भरने की स्थिति में नल कनेक्शन काटने का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त, मुख्य पाइपलाइन या नल में टिल्लू पंप लगाकर पानी खींचने, गाड़ियों को धोने अथवा मवेशियों को नहलाकर पानी बर्बाद करने पर 500 रुपए का जुर्माना लगाया जाएग।
नया नल कनेक्शन: शुल्क और महीने का बिल
-नया कनेक्शन शुल्क: अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के परिवारों के लिए 1000 रुपए और अन्य वर्ग के परिवारों के लिए 2500 रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है।
-संस्थागत कनेक्शन: स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 5000 रुपए, जबकि व्यापारिक या औद्योगिक उपयोग वाले कनेक्शन के लिए 8000 से 10000 रुपए तक देने होंगे।
-मासिक जल कर: जनजातीय विकासखंड वाले क्षेत्रों में 60 रुपए, मास्टर प्लान और अधिसूचित पंचायतों में 120 रुपए, सामान्य ग्राम पंचायतों में 100 रुपए और सार्वजनिक संस्थानों के लिए 200 रुपए प्रति माह बिल तय किया है।
हर पंचायत में गठित होगी पानी समिति
अब गांव में जलापूर्ति का संचालन केवल सरपंच और सचिव के भरोसे नहीं रहेगा। प्रत्येक ग्राम पंचायत में अधिकतम 20 सदस्यों वाली पानी समिति का गठन करना अनिवार्य किया गया है, जिसमें 50 फीसदी महिलाएं होंगी। सरपंच इस समिति के अध्यक्ष और सचिव इसके पदेन सचिव रहेंगे। पानी की गुणवत्ता, सह्रश्वलाई के समय और बिल संग्रह से जुड़े सभी फैसले समिति लेगी।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad
