झारखंड HC का अहम निर्देश, सहायक आचार्य नियुक्ति में B.Ed डिग्रीधारकों के मामले पर फिर होगा विचार

राज्य

रांची.

हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में सहायक आचार्य नियुक्ति बीएड की डिग्री को लेकर उम्मीदवारी खारिज किए गए अभ्यर्थियों को राहत मिली है। अदालत ने शिल्पा कुमारी एवं अन्य की याचिका स्वीकार करते हुए जेएसएससी को उनकी उम्मीदवारी पर विज्ञापन की शर्तों के अनुरूप दोबारा विचार करने और नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने पर उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

मामले में याचिकाकर्ताओं को जेएसएससी की ओर से नोटिस जारी किया गया था। इसमें कहा गया था कि उनके द्वारा प्राप्त बीएड की डिग्री विज्ञापन में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता की शर्तों के अनुरूप नहीं है। इसी आधार पर उनकी उम्मीदवारी पर विचार नहीं किया गया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शुभम मिश्रा और अधिवक्ता ज्ञानदेव राज ने अदालत को बताया कि प्रार्थी ने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के प्रविधानों के अनुरूप बीएड की डिग्री हासिल की है। उनके पास झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) का प्रमाणपत्र भी है। ऐसे में वे विज्ञापन में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और अन्य आवश्यक शर्तें पूरी करते हैं। अधिवक्ताओं ने दलील दी कि केवल बीएड की अवधि या उसकी प्रकृति के आधार पर अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी खारिज नहीं की जा सकती। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने विप्लव दत्ता एवं अन्य के मामले में पारित आदेश के आलोक में याचिका स्वीकार कर ली। अदालत ने जेएसएससी को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं की उम्मीदवारी पर विज्ञापन की शर्तों के अनुसार विचार करे और उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने के संबंध में उचित निर्णय ले।

माध्यमिक आचार्य नियुक्ति से संबंधित जनहित याचिका निष्पादित
झारखंड हाई कोर्ट में माध्यमिक आचार्य नियुक्ति से संबंधित जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने जनहित याचिका निष्पादित कर दी। सुनवाई के दौरान जेएसएससी की ओर से अदालत को बताया गया कि 877 अभ्यर्थियों की नियुक्ति के लिए राज्य सरकार से अनुशंसा कर दी गई है। 204 पदों के लिए उपयुक्त अभ्यर्थी नहीं मिल सके हैं। वहीं, 292 अभ्यर्थियों के दस्तावेज के सत्यापन के दौरान कुछ त्रुटियां पाई गई हैं। इन अभ्यर्थियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। आयोग की ओर से अदालत को नियुक्ति प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया गया।

सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से अदालत से माध्यमिक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय-सीमा निर्धारित करने का आग्रह किया गया। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर पुनर्परीक्षा कराए जाने को गलत माना है। एकल पीठ ने मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का भी आदेश दिया है। जेएसएससी की ओर से अदालत को बताया गया कि खंडपीठ और एकल पीठ के आदेश के बाद मामले की परिस्थितियां अलग हो गई हैं। इस पर खंडपीठ ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में माध्यमिक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय-सीमा निर्धारित करना संभव नहीं है। जेएसएससी का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने जनहित याचिका निष्पादित कर दी।

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