परीक्षा और मूल्यांकन में भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश, राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू

मध्य प्रदेश राज्य

भोपाल 

उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा कि प्रवेश, पढ़ाई, परीक्षा और परिणाम में समयबद्धता शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता की मूल आवश्यकता है। समय पर प्रवेश, नियमित अध्ययन-अध्यापन, निर्धारित समय पर परीक्षा एवं परिणाम तथा अकादमिक कैलेंडर का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किए बिना विद्यार्थियों का समग्र एवं न्यायसंगत मूल्यांकन संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए इस सत्र से ‘सार्थक ऐप’ के माध्यम से उनकी उपस्थिति दर्ज की जाएगी।

मंत्री  परमार ने भोपाल स्थित एलएनसीटी विश्वविद्यालय में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा में परीक्षा संचालन एवं मूल्यांकन : राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 केवल शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन का दस्तावेज नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, जीवन-मूल्यों और दृष्टिकोण के अनुरूप विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास का राष्ट्रीय संकल्प है। इसी भावना के अनुरूप हमारी परीक्षा एवं मूल्यांकन व्यवस्था भी पारदर्शी, समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण, विद्यार्थी-केंद्रित और परिणामोन्मुख होनी चाहिए।

मंत्री  परमार ने कहा कि परीक्षा केवल विद्यार्थी के ज्ञान को मापने का माध्यम नहीं, बल्कि उसकी प्रतिभा, क्षमता, कौशल, चिंतन, सृजनशीलता और संभावनाओं को पहचानने का अवसर बननी चाहिए। भारतीय ज्ञान परंपरा शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रखती, बल्कि विद्यार्थी के समग्र व्यक्तित्व विकास पर बल देती है। इसके लिए शिक्षकों को विद्यार्थियों के प्रत्येक पहलू को समझना और उनके साथ निरंतर शिक्षक-विद्यार्थी संवाद स्थापित करना आवश्यक है।

मंत्री  परमार ने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली एवं एलएनसीटी विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह कार्यशाला भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा दृष्टि के समन्वय से परीक्षा एवं मूल्यांकन व्यवस्था में सकारात्मक, सार्थक एवं दूरगामी परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। मध्यप्रदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप भारतीय ज्ञान परंपरा से समृद्ध ऐसी आदर्श परीक्षा एवं मूल्यांकन पद्धति विकसित करेगा, जो देश के लिए भी अनुकरणीय बने।

मंत्री  परमार ने कहा कि देशभर से आए कुलगुरुओं, कुलसचिवों, परीक्षा नियंत्रकों, शिक्षाविदों एवं विषय-विशेषज्ञों का सामूहिक मंथन ऐसी मूल्यांकन व्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा, जिसमें विद्यार्थी के ज्ञान के साथ उसकी प्रतिभा, कौशल, चिंतन, सृजनशीलता और समग्र क्षमता का न्यायसंगत आकलन हो सके।

कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी, मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक  अशोक कड़ेल, मध्यप्रदेश प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति के पूर्व अध्यक्ष एवं शिक्षाविद् डॉ. रविंद्र कान्हेरे, महर्षि संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल, हरियाणा के पूर्व कुलपति एवं शिक्षाविद् डॉ. रमेश चंद्र भारद्वाज, मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के चेयरमैन डॉ. खेम सिंह डेहरिया, आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा, एलएनसीटी समूह के सचिव  अनुपम चौकसे सहित देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, शिक्षाविद एवं विषय-विशेषज्ञ उपस्थित थे।

 

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