इंदौर
कैंपस की चारदीवारी के भीतर विद्यार्थी का व्यवहार अब वहीं तक सीमित नहीं रहेगा। नौकरी के लिए उसकी शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ उसका आचरण भी देखा जाएगा। मध्यप्रदेश के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) में शुरू हुए नए सत्र के कैंपस प्लेसमेंट में कंपनियों ने विद्यार्थियों को परखने का दायरा बढ़ा दिया है।
अब कंपनियां विद्यार्थिकों के अंकों और तकनीकी योग्यता के साथ सॉफ्ट स्किल, अनुशासन, सांस्कृतिक गतिविधियों में भागीदारी और यहां तक कि पुलिस प्रकरण की जानकारी भी कंपनियां मांग रही हैं। इससे स्पष्ट है कि नौकरी के लिए अब केवल यह पर्याप्त नहीं कि विद्यार्थी कितना अच्छा पढ़ता है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण होगा कि उसका व्यवहार और पृष्ठभूमि कैसी है।
सेंट्रल प्लेसमेंट सेल प्रभारी डॉ. गोविंद महेश्वरी के अनुसार, प्लेसमेंट के दौरान कई बार कंपनियां विद्यार्थियों की व्यक्तिगत जानकारी मौखिक रूप से भी लेती हैं। कुछ कंपनियां अपने स्तर पर विद्यार्थियों का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन भी करवाती हैं। कंपनियों की बढ़ी सख्ती के पीछे पिछले साल आइईटी में सामने आई रैगिंग की घटना को भी एक कारण माना जा रहा है।
घटना में तृतीय और अंतिम वर्ष के कुछ विद्यार्थियों के नाम सामने आए थे। अंतिम वर्ष के कुछ विद्यार्थियों को जाब आफर मिलने के बाद संस्थान ने कंपनियों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद कुछ विद्यार्थियों को अब तक ज्वॉइनिंग नहीं मिली है। इससे कंपनियां विद्यार्थियों की पृष्ठभूमि को लेकर अपने स्तर पर भी सतर्क हो गई हैं।
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