अंबाला.
रेलवे की पुरानी और जर्जर कालोनियों में रहने वाले कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है। रेलवे बोर्ड ने 50 साल से अधिक पुराने और असुरक्षित घोषित किए जा चुके रेलवे क्वार्टरों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उनकी जगह आधुनिक बहुमंजिला आवास बनाने की योजना तैयार की है।
अब एकल मंजिल या कम ऊंचाई वाली कालोनियों के बजाय जमीन का बेहतर उपयोग करते हुए जी-4 या उससे अधिक मंजिल के भवन बनाए जा सकेंगे। इसके लिए रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे, उत्पादन इकाइयों और केंद्रीय संगठनों को असुरक्षित रेलवे कालोनियों की प्राथमिकता सूची तैयार कर कार्ययोजना भेजने के निर्देश दिए हैं। नई आवास नीति के तहत रेलवे का जोर कम जमीन में अधिक कर्मचारियों के लिए आवास उपलब्ध कराने पर है। स्थानीय भवन नियमों के अनुसार बहुमंजिला भवनों का निर्माण किया जाएगा। इससे दशकों पुराने छोटे और जर्जर क्वार्टरों की जगह कर्मचारियों को सुरक्षित और आधुनिक आवास उपलब्ध कराने का रास्ता साफ होगा।
अमृत भारत स्टेशन योजना से भी जोड़े जा सकेंगे प्रोजेक्ट
रेलवे बोर्ड के निर्देशों के अनुसार इन आवासीय पुनर्निर्माण परियोजनाओं के लिए राशि वर्क्स प्रोग्राम के प्लान हेड-51 यानी कर्मचारी सुविधाओं के तहत उपलब्ध कराई जाएगी। जहां संभव होगा, इन परियोजनाओं को स्टेशन पुनर्विकास और अमृत भारत स्टेशन योजना से भी जोड़ा जा सकेगा। नए रेलवे क्वार्टर कर्मचारियों को सौंपने से पहले उन्हें एचआरएमएस के एस्टेट माड्यूल पर दर्ज करना भी अनिवार्य होगा। इससे आवासों के आवंटन और रेलवे की संपत्तियों के प्रबंधन को डिजिटल तरीके से संचालित किया जा सकेगा। नाम न छापने की शर्त पर मंडल के एक अधिकारी ने बताया कि बोर्ड द्वारा बनाई गई नीति के अनुसार कंडम आवासों का सर्वे शुरू कर दिया गया है।
अंबाला मंडल की पुरानी कालोनियों को भी मिल सकता है लाभ
रेलवे बोर्ड के फैसले से अंबाला मंडल की पुरानी रेलवे कालोनियों के पुनर्निर्माण की उम्मीद भी बढ़ी है। मंडल स्तर पर पुराने और असुरक्षित आवासीय भवनों की स्थिति का आकलन कर प्राथमिकता के आधार पर प्रस्ताव तैयार किए जा सकते हैं। हालांकि, अंबाला मंडल की कौन-कौन सी कालोनियां पहले चरण में शामिल होंगी, यह संबंधित जोनल रेलवे की प्राथमिकता सूची और स्वीकृत कार्ययोजना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। रेलवे बोर्ड ने जोनल रेलवे को आगामी पिंक बुक और वर्क्स प्रोग्राम में ऐसे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल करने के निर्देश दिए हैं।
ये होंगे फायदे –
- – नई व्यवस्था में टाइप-2 और टाइप-3 रेलवे क्वार्टरों का कवर्ड एरिया बढ़ाया जाएगा।
- – इन्हें आधुनिक दो और तीन कमरों वाले आवास के मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा।
- – कर्मचारियों को पुराने छोटे कमरों की बजाय पहले से अधिक जगह वाले और सुविधाजनक आवास मिल सकेगी।
- – तीन से अधिक मंजिल वाले भवनों में लिफ्ट की व्यवस्था अनिवार्य होगी।
- – छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र, आधुनिक रसोई की फिटिंग और वाहनों के लिए अलग पार्किंग की व्यवस्था
प्रमुख चुनौतियां –
- – पुराने क्वार्टरों को तोड़ने से पहले वहां रह रहे कर्मचारियों के लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था करनी होगी।
- – बड़े पैमाने पर निर्माण के लिए पर्याप्त बजट, निर्माण की गुणवत्ता और निर्धारित समय में काम पूरा करना चुनौती होगी।
- – कालोनियों को चरणबद्ध तरीके से खाली कराने के दौरान कर्मचारियों को अस्थायी परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है।
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