रीगल से गांधी हॉल तक बदलेगी ट्रैफिक की तस्वीर, दो नए 3-लेन रेलवे ओवरब्रिज का होगा निर्माण

मध्य प्रदेश राज्य

 इंदौर 

रीगल से गांधी हॉल के बीच मौजूदा शास्त्री बिज के स्थान पर तीन-तीन लेन के दो अलग-अलग रेलवे ओवर ब्रिज बनाए जाएंगे। पूर्व में जहां शास्त्री ब्रिज को हटाकर उसके स्थान पर एक ही ब्रिज बनाकर उस पर से वाहनों की आने-जाने की व्यवस्था करने की बात कही जा रही थी। अब रेलवे द्वारा मौजूदा शास्त्री ब्रिज के समानांतर ही दूसरा ब्रिज बनाने की योजना बनाई जा रही है।

यह ब्रिज शास्त्री ब्रिज के समानांतर बनेगा। रीगल की ओर जज बंगलों के पास से होकर यह गांधी हॉल परिसर में उतरेगा। इन दोनों ब्रिजों के निर्माण का जिम्मा इंदौर विकास प्राधिकरण को दिया जाएगा। फिलहाल रेलवे के अफसरों द्वारा आईडीए को इसके लिए प्रस्ताव दिया गया है।

गुरुवार को इस संबंध में सांसद शंकर लालवानी की अध्यक्षता में आईडीए व रेलवे के अफसरों की बैठक हुई। बैठक में तय हुआ कि सिंहस्थ तक मौजूदा शास्त्री ब्रिज के समानांतर रेलवे ओवर ब्रिज बनाया जाएगा। इसके बनने के बाद शास्त्री ब्रिज को तोड़कर नया ब्रिज बनाया जाएगा। दोनों ब्रिज की ऊंचाई मौजूदा शास्त्री ब्रिज से अधिक रहेगी।

175 करोड़ में तैयार होंगे दोनों ब्रिज

रेलवे द्वारा अभी तक शास्त्री ब्रिज को तोड़कर नया ब्रिज बनाने पर 120 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना थी। अब शास्त्री ब्रिज के सामानांतर नया ब्रिज बनाने पर 50 से 55 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इस तरह दोनों ब्रिज का निर्माण 175 करोड़ में हो सकेगा।

तीन-तीन लेन के होंगे दोनो ब्रिज

नई योजना के तहत शास्त्री ब्रिज के स्थान पर बनाए जाने वाला ब्रिज तीन लेन का होगा और उसके समानांतर बनने वाला ब्रिज भी तीन लेन का होगा। पूर्व में बनने वाले ब्रिज पर जगह कम होने के कारण पैदल चलने वालों के लिए अलग से फुटओवर ब्रिज बनाने की योजना थी।

अब वो फुटओवर ब्रिज नहीं बनेगा और दोनों ब्रिज पर फुटपाथ का निर्माण किया जा सकेगा। शास्त्री ब्रिज के स्थान पर बनने वाले ब्रिज की चौड़ाई 10.3 मीटर होगी। वही इसके समानांतर बनने वाले ब्रिज की चौड़ाई 9 से 9.30 मीटर होगी। जब दोनों ब्रिज तैयार हो जाएंगे तो आने व जाने के लिए अलग-अलग ब्रिज का उपयोग होगा।

दो से तीन माह में रेलवे बोर्ड से मिलेगी स्वीकृति

पूर्व में रेलवे ही शास्त्री ब्रिज को तोड़कर नया ब्रिज बनाने वाला था। इसके लिए बजट तय होने के साथ रेलवे बोर्ड से मंजूरी भी मिल गई थी। अब दूसरा समानांतर ब्रिज बनाने का निर्णय लिया गया और निर्माण का जिम्मा भी आईडीए को दिया जा रहा है। दोनों ब्रिज में रेलवे वाले हिस्से के कार्य का सुपरविजन रेलवे विभाग द्वारा किया जाएगा।

आईडीए दोनों ब्रिज का निर्माण करेगा

रेलवे दोनो ब्रिज के निर्माण की राशि आईडीए को देगा और आईडीए दोनों ब्रिज का निर्माण करेगा। ऐसे में नया ब्रिज बनाने के लिए अभी रेलवे बोर्ड से मंजूरी मिलने में दो से तीन माह का समय लगेगा। इधर गुरुवार को शहर में हुई आइडीए की अफसरों की बैठक में आईडीए के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. परीक्षित संजय राव झाड़े ने नए ब्रिज के निर्माण के लिए सर्वे कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। सर्वे के आधार पर ब्रिज के अलाइनमेंट, संरचना, ऊंचाई, चौड़ाई, यातायात प्रबंधन सहित अन्य तकनीकी पहलुओं को अंतिम रूप दिया जाएगा।

 

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