भोपाल
भोपाल विकास योजना 2005 के अंतर्गत मेट्रो रेल परियोजना के दोनों ओर 500-500 मीटर के दायरे को प्राप्ति क्षेत्र घोषित किया जा रहा है। इस प्रस्ताव पर शुक्रवार को टीएंडसीपी में सुनवाई होगी। इससे मेट्रो कॉरिडोर के आसपास के निर्माण और विकास अधिकारों पर बड़ा असर पड़ेगा। आपत्तियों का निराकरण कर इसी माह में रीसिविंग एरिया को लेकर मास्टर प्लान में बदलाव का – नोटिफिकेशन जारी होगा। भोपाल सिटीजन फोरम के संयोजक सुरेंद्र तिवारी ने आपत्ति लगाई हुई है। शुक्रवार को वे व अन्य इस पर अपनी बात रखेंगे। मध्य प्रदेश हस्तांतरणीय विकास अधिकार यानी टीओडी नियम, 2018 के तहत रीसिविंग एरिया तय किया जा रहा है। इससे 'ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट' बढ़ेगा।
इस तरह होगा लाभ
-वर्टिकल डेवलपमेंट होगा। अभी 1:25 एफएआर है, अतिरिक्त खरीदी से ये तीन से पांच गुना तक हो जाएगा। अतिरिक्त मंजिलें बना सकेंगे।
-मेट्रो स्टेशन के 500 मीटर के भीतर घनी आबादी और कमर्शियल हब बनने से लोग निजी वाहनों की जगह मेट्रो का उपयोग अधिक करेंगे, जिससे मुख्य सड़कों पर यातायात का दबाव कम होगा।
-इस क्षेत्र में प्लॉट और प्रॉपर्टीज की रीसेल व व्यावसायिक वैल्यू में तेज इजाफा होगा, जिससे स्थानीय भू-स्वामियों को आर्थिक फायदा होगा।
मेट्रो से 500 में संसि 50 सीटर वाया जा रहा है। इसके लिए आपत्तियों पर सुनवाई होगी। शहरी विकास के लिए शासन की पॉलिसी है। उसके तहत ही प्रक्रिया की जा रही है।- कौशलेंद्र विक्रमसिंह, आयुक्त सह संचालक टीएंडसीपी
ये नुकसान भी संभावित
-पहले से सीवरेज, पेयजल, ड्रेनेज और बिजली नेटवर्क को अपग्रेड नहीं किया गया, तो हाईराइज बिल्डिंग्स बनने से बुनियादी सुविधाओं का संकट खड़ा हो जाएगा।
-भले ही लोग लंबी दूरी के लिए मेट्रो लें, लेकिन 500 मीटर के दायरे की आंतरिक सड़कों और गलियों में गाडियों की संख्या और पार्किंग की कमी से भारी जाम लगेगा।
-1-2 मंजिला पुराने रिहायशी मकानों के ठीक बगल में बहुमंजिला इमारतें बनने से धूप, वेंटिलेशन और प्राइवेसी प्रभावित होगी।
-घने निर्माण से हरियाली कम होगी और 'कंक्रीट हीट आइलैंड' का प्रभाव बढ़ेगा, जिससे तापमान बढ़ेगा।
-मेट्रो कॉरिडोर के आसपास जमीनें और घर बहुत महंगे हो जाएंगे, जिससे मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग के लिए क्षेत्र में रहना या कारोबार करना नामुमकिन सा हो जाएगा।
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