नंदीग्राम बनी शुभेंदु अधिकारी के लिए अहम सीट, जानें क्यों बढ़ी सियासी हलचल

राजनीती

कलकत्ता
पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम सीट का उपचुनाव मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनकी पहली परीक्षा भी है। इस सीट पर उपचुनाव से पहले नाटकीय घटनाक्रम देखा जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संचिता प्रधान डे को अपना उम्मीदवार बनाकर उतारा था। वहीं मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद संचिता प्रधान ने बिना कोई वजह बताए ही अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान के समर्थन का ऐलान कर दिया। इसके कुछ देर बाद ही एक पुराने मामले में प्रधान की गिरफ्तारी हो गई। राहुल गांधी ने अपने उम्मीदवार की गिरफ्तारी को लेकर शुभेंदु सरकार पर निशाना साधा और इसे लोकतंत्र पर प्रहार बताया है।

अधिकारी ने खेला इमोशनल दांव
शुभेंदु अधिकारी ने भी नंदीग्राम सीट पर इमोशनल दांव खेलते हुए अपने पीए रहे चंद्रनाथ रथ की मां हसीरानी रथ को अपना उम्मीदवार बनाया है। 6 मई को रथ की मध्यमग्राम में हत्या कर दी गई थी। सीबीआई इस हत्याकांड की जांच कर रही है।

शुभेंदु अधिकारी के लिए क्यों अहम है नंदीग्राम
नंदीग्राम की सीट शुभेंदु अधिकारी की प्रतिष्ठा से इसलिए जुड़ी है क्योंकि उन्होंने अपनी असल राजनीति की शुरूआत यहीं से की थी। उन्होंने नंदीग्राम में ही ममता बनर्जी के साथ किसानों के भूमि अधिग्रहण के खिलाफ मोर्चा खोला था। इसी वजह से बंगाल से लेफ्ट की सरकार चली गई और ममता बनर्जी की अगुआई में टीएमसी की सरकार बन गई। ममता बनर्जी बंगाल में 15 साल मुख्यमंत्री रहीं लेकिन शुभेंदु अधिकारी के रास्ते ममता बनर्जी से अलग हो गए।

शुभेंदु अधिकारी 2016 में नंदीग्राम से विधायक चुने गए। वहीं 2021 में उन्होंने अपनी राजनीतिक गुरु ममता बनर्जी को ही नंदीग्राम से हरा दिया। यहीं से नंदीग्राम के समीकरण बदलने लगे। 2026 में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दो जगहों से चुनाव लड़ा और नंदीग्राम सीट पर फिर से जीत हासिल की। हालांकि उन्होंने भवानीपुर सीट को चुना और इसलिए नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं। हालांकि शुभेंदु अधिकारी इस सीट को किसी कीमत पर हाथ से निकलने नहीं देना चाहते हैं।

6 अक्टूबर पर नंदीग्राम के साथ ही रेजीनगर सीट पर भी उपचुनाव होने हैं। ये उपचुनाव बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की छवि पर बड़ा असर डालने वाले हैं। अधिकारी ने मुख्यमंत्री बनते ही कई बड़े फैसले लिए हैं और बड़े परिवर्तन का प्रयास किया है। अब इन दोनों सीटों की जनता इस बात पर भी मुहर लगाएगी कि उसे उनके फैसले पंसद आए हैं या नहीं। वहीं अधिकारी पर यह भी दवाब है कि बिहार की बांकीपुर सीट जैसा हाल यहां ना हो

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