योगी सरकार में यूपी की स्वास्थ्य व्यवस्था को मिली नई रफ्तार
– साढ़े नौ वर्षों में स्वास्थ्य ढांचे का हुआ विस्तार, सीएचसी से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक बढ़ी सुविधाएं
– सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 821 से बढ़कर 977 हुए, करीब 19% की हुई वृद्धि
– नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 542 से बढ़कर 721 हुए, करीब 33% का हुआ इजाफा
– सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाओं और क्रिटिकल केयर सुविधाओं का भी हुआ विस्तार
लखनऊ
योगी सरकार के कार्यकाल में साढ़े नौ वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र के बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय विस्तार दर्ज किया गया है। प्रदेश में जिला स्तर से लेकर सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक स्वास्थ्य सुविधाओं का नेटवर्क बढ़ा है। इसके साथ ही क्रिटिकल केयर, डायग्नोस्टिक सेवाओं, नर्सिंग शिक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।
सीएचसी नेटवर्क में 19 प्रतिशत का हुआ इजाफा
योगी सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए साढ़े नौ वर्षों में चिकित्सा संस्थानों की संख्या बढ़ाने, प्राथमिक और सामुदायिक स्तर पर सुविधाएं मजबूत करने तथा विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं को जिलों और ब्लॉक स्तर तक पहुंचाने पर जोर दिया है। वर्ष 2017 में प्रदेश में 109 जिला स्तरीय राजकीय एवं विशिष्ट चिकित्सालय थे, जिनकी संख्या वर्ष 2026 में बढ़कर 234 हो गई। इस तरह इन संस्थानों की संख्या में करीब 115 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। इसी अवधि में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) की संख्या 821 से बढ़कर 977 हो गई। सीएचसी नेटवर्क में करीब 19 प्रतिशत का विस्तार हुआ। वहीं, ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या 2,811 से बढ़कर 3,035 हुई है, जो करीब 8 प्रतिशत की वृद्धि है। नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में विस्तार अपेक्षाकृत अधिक रहा। वर्ष 2017 में 542 नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र थे, जबकि वर्ष 2026 में इनकी संख्या बढ़कर 721 हो गई। इस स्तर पर करीब 33 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। कुल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या भी 3,353 से बढ़कर 3,756 हो गई, जो करीब 12 प्रतिशत की वृद्धि है।
29,896 आयुष्मान आरोग्य मंदिर से स्वास्थ्य सेवाओं को मिली रफ्तार
प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे निचली इकाई माने जाने वाले स्वास्थ्य उपकेंद्रों की संख्या में भी बड़ा विस्तार हुआ है। वर्ष 2017 में प्रदेश में 20,573 स्वास्थ्य उपकेंद्र थे, जबकि वर्ष 2026 में इनकी संख्या बढ़कर 28,845 हो गई। यह करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि है। इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के प्रयासों का संकेत मिलता है। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ योगी सरकार ने नई सुविधाओं को भी स्वास्थ्य संस्थानों से जोड़ने पर जोर दिया है। वर्ष 2017 में नगरीय आयुष्मान आरोग्य मंदिर नहीं थे, वर्ष 2026 तक इनकी संख्या 1,425 हो गई। प्रदेश में कुल 29,896 आयुष्मान आरोग्य मंदिर हैं, जिनमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से 14,872 तथा अन्य माध्यमों से संचालित केंद्र भी शामिल हैं।
543 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर खोले गये एनेस्थीसिया क्लीनिक
स्वास्थ्य व्यवस्था के विस्तार के साथ मानव संसाधन तैयार करने के लिए नर्सिंग शिक्षा के नेटवर्क को भी बढ़ाया गया है। वर्ष 2017 में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ नर्सिंग कॉलेजों की संख्या शून्य थी, जो वर्ष 2026 में 73 हो गई। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एनेस्थीसिया क्लीनिक और अन्य विशेषज्ञ सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाई गई है। कुल 543 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एनेस्थीसिया क्लीनिक तथा मानव संसाधन तैनाती की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा ऑक्सीजन प्लांट की संख्या 189 और ब्लड स्टोरेज यूनिट की संख्या 161 तक पहुंच चुकी है। क्रिटिकल केयर सेवाओं को मजबूत करने के लिए डिजिटल एक्स-रे मशीनों की उपलब्धता भी बढ़ाई गई है। ईसीआरपी-2 के तहत 370 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डिजिटल एक्स-रे मशीनों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध कराई जा रही है। प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में बदलाव केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। योगी सरकार ने ऑक्सीजन प्लांट, ब्लड स्टोरेज, डिजिटल एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, क्रिटिकल केयर ब्लॉक और इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब जैसी सुविधाओं को भी विस्तार दिया है।
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